“जरा तनिक सोचों मेरे यारों
हालत अगर अब सा होता |
हिंदू मुश्लिम और सिख ईसाई,
सबकी सोच अलग होती,
तो खाक आज़ादी का जश्न ,
हम सबके आँगन में होता I
जो जान गंवाए हैं वो,
अपने ही थे, कोई गैर नहीं !
किसी के भैया, किसी के भाईजान,
किसी के पिता किसी के अबुजान !”
जब सूरज संघ अँधियारा हो ,
तब दीप का जलना जरुरी है I
जब प्यार की बोली लगे बाजार में ,
तब प्यार बचाना जरूरी है I
जब खतरा हो गद्दारों से ,
तब उन्हें मिटाना जरूरी है I
गुमराह हो जब यूथ मेरा,
सही राह दिखाना जरूरी है I
जब नारी खुद को असहाय समझे,
तब रानी लक्ष्मी ,बनाना ही जरूरी है I
जब देश क्रूर के हाथ में हो ,
तब भगत, सुभाष को आना जरूरी है I
जब बात सीधे बनती ना दिखे ,
तब टेढ़ी बात जरूरी है I
सम्भल जाओ तिरछी नजर वालों ,
क्योंकि यहां हर बच्चा-बच्चा प्रहरी है I
जय हिंद ,जय भारत