Durga Chalisa ke Chamtkari Fayade Mahatva|
Durga Chalisa ke Chamtkari Fayade Mahatva- श्री दुर्गा चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन, महत्व और 10 चमत्कारी लाभ जानें। नियमित पाठ से मन की शांति, संकटों का नाश और धन-समृद्धि कैसे प्राप्त करें
Durga Chalisa lyrics in Hindi
- नमो नमों दुर्गे सुख करनी, नमो नमो अम्बे हरनी |
- निराकार है ज्योति तुम्हारी ,तिहु लोक फैली उजियारी |
- शशि ललाट मुख महा विशाला,नेत्र लाल भृकुटी विकराला |
- रूप मातु को अधिक सुहावे,दरश करत जन अति सुख पावे |
- तू संसार शक्ति लय कीना,पालन हेतु अन्न धन दीना |
- अन्नपूर्ण हुई जग पाला,तुम्हीं आदि सुंदरी बाला|
- प्रलय काल सब नाशन हारी, तुम गौरी शिव शंकर प्यारी|
- शिव योगी तुम्हारे गुण गावे,ब्रह्मा विष्णु तुम्हे नीत ध्यावे |
- रूप सरस्वती को तुम धारा,दे सुबुद्धि ऋषि मुनीन उबारा |
- धरा रूप नरसिंह को अम्बा,प्रकट भाई फाड़ कर खंभा|
- रक्षा करी प्रहलाद बचायों, हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो|
- लक्षमी रूप धरो जग माहीं,श्री नारायण अंग समाही|
- क्षीर सिंधु में करत विलासा,दया सिंधु दीजै मन आशा |
- हिंगलाज में तुम्हीं भवानी, महिमा अमिट न जात बखानी|
- मातंगी अरु धूमवाती माता , भूनेश्वरी बंगला सुखदाता|
- श्री भैरव तारा जग तारिणी,छिन्न भाल भव दुखनिवारिणी |
- केहरी वाहन सोह भवानी,लंगूर वीर चालत अगवानी |
- कर में खप्पर खड्ग बिराजे,जाको देख काल डर भागे |
- सोहे अस्त्र और त्रिशूला,जाते उठत शत्रु हिय शूला |
- नगर कोटि में तुम्हीं विराजत, तिहूं लोक में डंका बाजात |
- शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे,रक्त बीज शंखन संघारे|
- महिषासुर नृप अति अभिमानी,जेहि अधमार महिअकुलानी|
- रूपकराल कालिका धारा ,सेन सहित तुम तीही संहारा|
- परी गाढ़ संतन पर जब-जब ,भई सहाय मातु तुम तब-तब|
- अमर पुरी अरु-बासव लोका,तब महिमा सब रहे अशोका
- ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी,तुम्हें पूजे सदा नर नारी |
- प्रेम भक्ति जो यश गावें,दुख दरिद्र निकट नहिआवे
- ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई,जन्म मरण ताकि छूटि जाई |
- जोगी सुर मुनि क़हत पुकारी,जोग न हो बिनु शक्ति तुम्हारी |
- शंकर आचरज तप किन्हों,काम अरु क्रोध जीति सब लिंहों |
- निशि दिन ध्यान धरो शंकर को काहू काल नहीं सुमिरो तुमको
- शक्ति रूप को मरम न पायो, शक्ति गई तब मन पछितायो |
- शरणागत हुई कीर्ति बखानी,जयजय जय जगदंब भवानी
- भई प्रसन्न आदि जगदंबा ,दई शक्ति नहीं कीन्ह बिलम्बा|
- मोको मातु कष्ट अति घेरो,तुम बिन कौन हरे दुख मेरो |
- आशा तृष्णा निपट सतावे,मोह मदा दिक सब विनशावे|
- शत्रु नाश कीजे महारानी सुमिरौ एक चित तुम्हें भवानी |
- करो कृपा हे मातु दयाला,रिद्धि सिद्धि दे करहू निहाला
- जब लगी जियौं दया फल पाऊँ तुम्हारों यश मैं सदा सुनाऊँ
- दुर्गा चालीसा जो नर गावे ,सब सुख भोग परम पावे|
- देवी दास शरण निज जानी,करहु कृपा जगदम्ब भवानी |
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दुर्गा चालीसा का वर्णन (Description of Durga Chalisa)
दुर्गा चालीसा, जिसे श्री दुर्गा चालीसा भी कहते हैं, आदिशक्ति माँ दुर्गा को समर्पित है।
* स्वरूप: इसमें माँ दुर्गा के दिव्य और मनमोहक स्वरूप, उनके तेज, और उनकी महिमा का गुणगान किया गया है।
* स्तुति: चालीसा की शुरुआत माँ की स्तुति से होती है – “नमो नमो दुर्गे सुख करनी, नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी” (सुख देने वाली और दुःख हरने वाली माँ दुर्गा को नमस्कार)।
* लीलाएं: इसमें देवी के विभिन्न रूपों (जैसे महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) और उनके द्वारा किए गए परोपकारी कार्यों (जैसे राक्षसों का संहार) का संक्षिप्त वर्णन है।
* भाव: यह पाठ भक्त और भगवान के बीच प्रेम, श्रद्धा और अटूट विश्वास को दर्शाता है, जिसमें भक्त माँ से अपनी रक्षा और कृपा की कामना करता है।
✨ दुर्गा चालीसा का लाभ (Benefits of Durga Chalisa)
दुर्गा चालीसा का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्तों को कई चमत्कारी लाभ प्राप्त होते हैं:
| लाभ का क्षेत्र | विशिष्ट लाभ |
|—|—|
| मानसिक शांति | * नकारात्मक विचारों और तनाव से मुक्ति मिलती है। |
| | * मन शांत और स्थिर रहता है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है। |
| सुरक्षा एवं रक्षा | * माँ दुर्गा भक्त के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाती हैं। |
| | * सभी प्रकार के भय, बुरी शक्तियों और संकटों से रक्षा होती है। |
| | * शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। |
समृद्धि और सफलता
* जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का आगमन होता है। |
| | * धन, यश और खोया हुआ सम्मान पुनः प्राप्त होता है। |
| | * जीवन में स्थिरता और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। |
| स्वास्थ्य | * शारीरिक और मानसिक रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है। |
| | * असाध्य रोगों में भी लाभ होता है (श्रद्धापूर्वक पाठ से)। |
| आत्मविश्वास | * निराशा के भाव दूर होते हैं और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। |
| | * कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। |
विशेष: नवरात्रि के नौ दिनों में इसका पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
दुर्गा चालीसा पाठ की सही विधि (Correct Method for Reciting Durga Chalisa)
दुर्गा चालीसा का पाठ करते समय शुद्धता, श्रद्धा और सही नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है ताकि इसका पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
1. 🧼 तैयारी और शुद्धता
* स्नान: पाठ शुरू करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* स्थान: पूजा स्थल या किसी शांत और पवित्र स्थान का चयन करें।
* आसन: भूमि पर न बैठकर किसी शुद्ध आसन (जैसे ऊनी या कुशा का आसन) पर बैठें।
* दिशा: मुख पूर्व दिशा (ईशान कोण) की ओर रखें।
2. 🪔 पूजन सामग्री
* माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
* एक दीपक (तेल या घी का) जलाएं।
* धूप या अगरबत्ती जलाएं।
* पुष्प (विशेषकर लाल रंग के) और रोली-चंदन (तिलक के लिए) रखें।
* जल से भरा एक पात्र (लोटा) रखें।
3. ✨ पाठ आरंभ करने का क्रम
* शुद्धि और संकल्प:
* हाथ में थोड़ा जल लेकर “ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु” मंत्र का उच्चारण करते हुए स्वयं पर छिड़कें।
* माँ दुर्गा का ध्यान करते हुए मन में यह संकल्प लें कि आप किस उद्देश्य के लिए पाठ कर रहे हैं (जैसे, सुख-शांति या किसी संकट से मुक्ति)।
* गणेश वंदना:
* किसी भी पूजा को सफल बनाने के लिए सर्वप्रथम भगवान गणेश की वंदना करें (जैसे, गणेश चालीसा का एक श्लोक)।
* माँ दुर्गा का ध्यान (Dhyaan):
* इसके बाद माँ दुर्गा के किसी ध्यान मंत्र का जाप करें या उन्हें सच्चे मन से याद करें।
* पाठ:
* अब श्री दुर्गा चालीसा का पाठ स्पष्ट उच्चारण और शांत मन से करें।
* कम से कम एक बार, तीन बार, सात बार, या ग्यारह बार पाठ करना शुभ माना जाता है।
4. 🔔 समाप्ति
* आरती: चालीसा पाठ समाप्त होने के बाद माँ दुर्गा की आरती करें।
* भोग (नैवेद्य): माँ को फल या मिष्ठान का भोग लगाएं।
* क्षमा याचना: जाने-अनजाने में हुई किसी गलती के लिए माँ से क्षमा मांगें।
* प्रसाद: सभी लोगों में प्रसाद वितरित करें।
📌 ध्यान रखने योग्य बातें
* समय: पाठ के लिए एक निश्चित समय निर्धारित करें (जैसे सुबह या शाम)।
* मांस-मदिरा: पाठ करने वाले व्यक्ति को इस दौरान मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का त्याग करना चाहिए।
* ब्रह्मचर्य: यदि आप किसी विशेष अनुष्ठान (जैसे नवरात्रि) में पाठ कर रहे हैं, तो ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ होता है।
Sangrah- internet & books
द्वारा – कृष्णावती कुमारी अध्यापिका (KVS)

