Top 5-Bhojpuri Vivah Geet lyrics In Hindi |टॉप 5 भोजपुरी विवाह गीतों के बोल हिंदी/देवनागरी में
Top 5-Bhojpuri Vivah Geet lyrics In Hindi-पारंपरिक 5 भोजपुरी विवाह गीत लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। हल्दी, मटकोर, छेका, द्वार पूजा और विदाई गीत (भोजपुरी लोकगीत) के बोल देवनागरी लिपि में भोजपुरी में नीचे लिखी गई हैं | मेरी वेबसाइट पर आप सभी का अभिनन्दन है |
टॉप 5 भोजपुरी विवाह गीतों के बोल (हिंदी/देवनागरी में)
1. छेका/सगुन गीत (नइहर छूटी आज ए बाबू)
(विवाह की शुरुआत में कन्या पक्ष द्वारा गाया जाता है)
> हो… कइसे कइलऽ विदाई ए बाबू,
> नइहर छूटी आज ए बाबू,
> रोवऽ तारा काहे ए बाबू,
> बेटी जात बिया परदेश ए बाबू।
> अंगना लिपाईल, मंडप छाईल,
> बजत बा सहनाई, बजत बा शहनाई…
> काहे मनवा उदास ए बाबू,
> बेटी जात बिया परदेश ए बाबू।
2. हल्दी गीत (पारंपरिक लोकगीत)
(हल्दी की रस्म के दौरान)
> बाबा हो कौन बाबा धन रुआ बनी जी?
> कहिया के हरदी सचले रुआ बनी जी?
> कहिया के हरदी कहिया के हरदी
> सचले रउराबानी जी कहिया के हरदी।
> हरदी के पियर रंग, प्रीत के निशानी जी,
> हरदी के पियर रांग, प्रीति के निशानी जी…
> दूल्हा-दुलहिन के हो जाई पियर देहिया जी,
> पिया रे हो जइहे, पिया रे हो जैहें जी …
3. मटकोर गीत (माटी कोड़ाए माई गानो हो
(माटी खोदने की रस्म के दौरान)
> लेके चले लोग मटकोर हो
> गीत गावेली सखियाँ मोर हों
> मंगल होखे आज, मंगल होखे आज हो…
> माटी कोड़ाए में मंगल गाव हो,
> देवता के पूजा खातिर माटी ले आवऽ हो।
4. द्वार पूजा गीत (आहे सजी बारात(दूल्हे के स्वागत के समय)
> आहे सजी बारात दूल्हा चलल चढ़ी के घुरबा हे,
> लहर लहर मारे गंगा जी के पनिया हे,
> साजी बारात दूल्हा चलल चढ़ी के घोरबा हे।
> अँगना में तोरण बँधाईल,
> माई के मन हर्षाइल…
> बबुनी के दूल्हा बाटे सोभावन,
> आज अंगना में दुअरा पूजन होई हो!
5. विदाई गीत (काहे को बियाही बिदेस
(बेटी की विदाई के भावुक क्षण पर)
> काहे को बियाही बिदेस,
> सुन बाबूजी के देस…
> बाबुल काहे दिहलऽ बिदाई
> हमके डोली में बैठाई
> काहे रोवतारे सारा परिवार,
> छूट गइलऽ अब हमार नइहर दुवार .
बिहार की शादी: लोकगीतों और पारंपरिक रस्मों का उत्सव
बिहार में विवाह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कृतियों का संगम है, जहाँ हर रस्म का अपना एक गीत और महत्व है। यहाँ की शादियाँ मुख्य रूप से भोजपुरी, मैथिली और मगही संस्कृति को दर्शाती हैं।
1. विवाह से पूर्व की मुख्य रस्में और गीत
| रस्म का नाम | विवरण | इससे जुड़ा प्रमुख लोकगीत |
| तिलक / छेका | विवाह की तिथि पक्की होने के बाद, दुल्हन का भाई दूल्हे के माथे पर तिलक लगाकर शादी का सगुन करता है। | छेका गीत या तिलक गीत (जिसमें दूल्हे के परिवार और गुणों का बखान होता है)। |
| मटकोर | शादी से एक या दो दिन पहले, महिलाएं गाते हुए शुद्ध मिट्टी लाने के लिए जाती हैं। इसी मिट्टी से विवाह का चूल्हा बनता है। | मटकोर गीत (माटी की शुद्धता और सौभाग्य पर आधारित)। |
| हल्दी कुटाई | सुहागिन महिलाएँ हल्दी पीसती हैं और उसे गाते हुए दूल्हा-दुल्हन को लगाती हैं। | हल्दी गीत (पीली हल्दी और मंगल कामना पर)। |
2. विवाह के दिन की प्रमुख रस्में
| रस्म का नाम | विवरण | इससे जुड़ा प्रमुख लोकगीत |
|—|—|—|
| द्वार पूजा/परछन | बारात के आगमन पर दूल्हे का स्वागत और परछन किया जाता है। इस दौरान, महिलाएँ दूल्हे और उसके परिवार को हास्यपूर्ण गारी गीत गाकर छेड़ती हैं। | गारी गीत (रिश्तेदारों पर मज़ाकिया कमेंट्स) और परछन गीत। |
| सुमंगली / भारा घुमाना | मंडप में फेरे से पहले, दूल्हे का भाई उसे कंधे पर उठाकर मंडप के चारों ओर घुमाता है (खासकर मिथिलांचल में)। | सुमंगली गीत (शुभ-मंगल कामना के लिए)। |
| कन्यादान | कन्यादान सबसे भावुक पल होता है, जब दुल्हन के पिता अपनी बेटी को दूल्हे को सौंपते हैं। | कन्यादान गीत (बेटी के विदाई के भाव को दर्शाते हैं)। |
3. विवाह के बाद की रस्में और गीत
| रस्म का नाम | विवरण | इससे जुड़ा प्रमुख लोकगीत |
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| कोहबर | फेरों के बाद दूल्हा-दुल्हन कोहबर घर में प्रवेश करते हैं, जहाँ दीवार पर कलाकृतियाँ बनी होती हैं। यह वैवाहिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। | कोहबर गीत (सुखी और लंबी वैवाहिक कामना के लिए)। |
| विदाई | दुल्हन अपने मायके को छोड़कर दूल्हे के साथ विदा होती है। यह सबसे भावुक क्षण होता है। | विदाई गीत (बेटी के पराये धन होने और माँ-बाप के दर्द को व्यक्त करते हुए)। |
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