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हिन्दुओं के सप्तक्षेत्र कौन कौन से हैं?

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जाने हिन्दुओं के सप्त क्षेत्र कौन कौन से हैं ?

हमारे धर्म पुराणों में कई ऐसे क्षेत्र बतायें गए हैं जो  सप्त क्षेत्र के नाम से  जाने जाते है I यूँ तो हिन्दू धर्म सभी धर्मो में वृहद है I
इसका विस्तार सर्वाधिक है I यह अथाह सागर के समान हैI साथियों इन्हीं में से सबसे महत्त्वपूर्ण सात सप्तक्षेत्र  माने गए है I
ससर्वप्रथम सनातन धर्म पृथ्वी पर सबसे प्राचीन यानि अति प्राचीनतम धर्म है I लेकिन इसके इतिहास के विषय में सभी इतिहासकार विद्वानों का अलग अलग मत है I आधुनिक इतिहास कार  हड़प्पा संस्कृतियो के मिले अवशेषों के आधर पर इसे कई हजार साल पहले का मानते  हैं I
साथियो धर्म बिना जीवन वैसे है,जैसे आक्सीजन के बिना जीवन  I बिना आक्सीजन हम साँस नहीं ले पाते हैl ठीक उसी प्रकार धर्म का जीवन से सम्बंध है I हमारा चंचल मन कभी स्थिर नहीं हो सकता यदि हमारे जीवन में धर्म का स्थान नहीं हो तो मन  स्थिर नहीं रहता है I मन मस्तिष्क धर्म को अपनाकर स्थिर रहता है I
साथियों हिन्दू धर्म का कोई अंत नहीं है I अब आइए जानते है कि वह सप्तक्षेत्र कौन और कहां है I

1• पहले नंबर पर आता है कुरुक्षेत्र –

महाभारतकालीन के अलावा पुराणों में भी कुरुक्षेत्र का वर्णन मिलता हैं I कहा गया है कि कुरु क्षेत्र एक ऐसा मार्ग है जहाँ जाकर  व्यक्ति अपने जीवन में जाने अंजाने में किए गये, पापों से मुक्त हो जाता है I
महाभारत के अनुसार कौरवों और पांडवों के पूर्वज राजा कुरु थे I इन्हीं के नाम से शहर का नाम कुरु क्षेत्र रखा गया I इसे कुरु जंगल के नाम से भी जाना जाता है I भागवत गीता में  इसे धर्म क्षेत्र कहा गया है I हम सभी यह जानते है कि महाभारत का युद्ध इसी कुरु क्षेत्र में लड़ा गया था I
यही वह स्थान है जहां न्याय अन्याय की लड़ाई लड़ी गई थी I यह पुण्य धर्म स्थल भारत के हरियाणा प्रांत  में स्थित है I हिन्दू ग्रंथो के अनुसार कुरुक्षेत्र सिर्फ एक शहर ही नहीं है I बल्कि क्षत्र के रूप में एक क्षेत्र है I इस स्थान का धार्मिक महत्व होने के कारण यहां विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाए जाते हैं I
गीता जयंती यहा कई युगों से मनाया जाता आ रहा है I इसे कुरुक्षेत्र उत्सव भी कहा जाता है I इस कारण 2016 इसवी से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन शुरू किया गया था I

2• दूसरा नंबर हरि क्षेत्र-

हरि क्षेत्र हिन्दू धर्म का प्रमुख क्षेत्र है जिसका उल्लेख बाराह पुराण में किया गया है I यहां पर कभी महर्षि पुलसत्य और राजा आदि भरत ने तपस्या की थी। इसलिए इसे पुलहा आश्रम भी कहाँ गया है I इसके अलावा यहां चार नदियों का संगम भी है I
जिनका नाम गंगा नदी,  सोन नदी,गंडक और सरयू नदी है I आज के समय में भारत के बिहार प्रांत में स्थित है I जो सोनपुर के नाम से जाना जाता हैI जहाँ आज भी विश्व प्रसिद्ध मेले का आयोजन  कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर  प्रति वर्ष होता है I इस मेला में दुनिया भर  से व्यापारी आते हैं I य़ह शहर पटना से बहुत पास है I

3• तीसरा है प्रभास क्षेत्र-

साथियों प्रभास क्षेत्र हिन्दुओं का सबसे पवित्र स्थल है I दोस्तों यह द्वारिका से उतर दिशा सौराष्ट्र में  स्थित है I स्कंद पुराण में इस क्षेत्र का महत्व बताया गया है I
चण्द्रमा  ने  इस स्थान पर दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्त होने के लिए तपस्या की थी I यदुवंशियों तथा वृंदावन की गोपियों का सबसे प्रमुख और  प्रिय तीर्थ स्थल  माना जाता है I यहाँ का गोपी  चंदन सबसे अधिक प्रसिद्ध है I

4• चौथा है भृगु क्षेत्र-

साथियो य़ह प्रभास क्षेत्र के दक्षिण में स्थित है I जो कि नर्मदा और समुद्र के संगम पर बना है I वर्तमान काल में इसे भाड़ोज के नाम से जाना जाता है। प्राचीन काल में इस क्षेत्र का नाम जम्मू मार्ग था I यहां पर एक भृगुरेश्वर नामक शिव लिंग  है। जो सबसे अधिक  प्रसिद्ध है I
यह नर्मदा नदी के तट पर भास्कर और द्वादशा दित्य  तीर्थों के पास स्थित है I इस क्षेत्र मे लगभग 55 पचपन प्रमुख तीर्थ है I महर्षि भृगु ने यहां दीर्घकालीन तपस्या की थी। जिसके कारण इसका नाम भृगु क्षेत्र पड़ाl इसके अलावा य़ह स्थान महर्षि जमदग्नि और परशुराम जी की भी तप- स्थली रही है।

5•पांचवा नंबर है, पुरुषोत्तम क्षेत्र-

साथियों पुराणों के अनुसार इस क्षेत्र को सबसे पवित्र क्षेत्र माना गया है I इसे वर्तमान समय में जगन्नाथ धाम कहा जाता है I जो कि ओडिशा प्रांत के पूरी में स्थित है I य़ह चारों धामों में से एक है I चारों धामों के वर्णन में इसका विस्तृत वर्णन किया गया है I
ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु बद्री नाथ धाम में स्नान करते है,और पश्चिम दिशा में गुजरात के द्वारिका में वस्त्र पहनते हैं I उसके बाद पूरी में भोजन करके रामेश्वरम में विश्राम करते हैं I यहां श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलभद्र और सुभद्रा के साथ विराजते हैं I

6• छठवा नम्बर है नैमिष क्षेत्र-

य़ह क्षेत्र उतर प्रदेश से लगभग 40 किलोमीटर  दूर पूर्व की ओर स्थित है I इसे आदि तीर्थ के भी नाम से जाना जाता है I य़ह यभू,  मनु और सतरूपा की  तपो भूमि है। नैमिष क्षेत्र की परिक्रमा 84 कोस की है I और य़ह परिक्रमा सबसे लंबी है I महाभारत के अनुसार यहां युधिष्ठिर और अर्जुन ने भी इस तीर्थ की यात्रा की थी I

7• सातवाँ नंबर है गया क्षेत्र-

य़ह क्षेत्र बिहार राज्य के बौद्ध गया में स्थित है I आपको बता दे कि हिन्दू धर्म में इस स्थान पर पितरों की मुक्ति के लिए पिंड दान देने का बहुत बड़ा महत्व है I इस क्षेत्र का नाम बाद में बौद्ध गया पड़ा क्योंकि यही पर भगवान बुद्ध को एक पीपल वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ग्यान की प्राप्ति हुई थी I
वायु पुराण, पद्म पुराण और अग्नि पुराण में गया क्षेत्र का विवरण और वर्णन विस्तार से बताया गया है I साथियों य़ह थे सातों क्षेत्र I साथियों उम्मीद करती हूं कि हमारा यह संग्रह सभी को पसंद आयेगा I इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें l
नोट-सभी जानकारिया इन्टरनेट  पत्रिका पेपर और बुजुर्गो (मौखिक)द्वारा एकत्रित की गई है।
 धन्यवाद साथियों,
संगृहीता-कृष्णावती कुमारी
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