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Top Kajari Geet Lyrics In Hindi सावन की कजरी लिरिक्स

Top Kajari Geet Lyrics In Hindi|सावन की कजरी लिरिक्स,भोजपुरी कजरी लिरिक्स लिखित 

Top Kajari Geet Lyrics In Hindi- सावन की चर्चा हो और उसमें कजरी की बात ना हो, ऐसा हो ही नहीं सकता |लोक गीतों की रानी कजरी सिर्फ गाने भर की हीं नहीं हैं,बल्कि यह सावन की सुंदरता और उल्लास को दरसाती हैं |

सावन का महिना आते ही चारों तरफ मेघ राज अपने समूह के साथ कभी रिमझिम बारिश तो कभी काले-काले बादल लिए चारों दिशाओं का भ्रमण करते नजर आते हैं |इस समय धरती माँ धानी चूनर ओढ़े दुलहन की तरह लगती है | चारों तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आती है |

जहां तक कजरी गीत की बात करूँ तो यह गीत सिर्फ सावन के महीने में यानि वर्षा ऋतु में ही गया जाता है |इसे वर्षा ऋतु का लोकगीत कहा जाता है |ऐसे तो कजरी गीत का तीन रूप है – बनारसी, मिर्जापुरी और गोरखपुरी | प्रचलन उत्तर भारत में बहुतायत है|यह अर्ध-शास्त्रीय गायन के रूप में सर्वाधिक विकसित हुआ है |

बनारस घराने की कजरी अपने अक्खड़पन और बिंदास बोलों की वजह से इसकी अलग हीं पहचान है |इसके बोलों में अइलें गइलें शब्दों का बखूबी प्रयोग होता है |मिर्जापुर की कजरी गायन शैली बहुत हीं कर्णप्रिय लगती है | कजरी गीत में अधिकतर पति के परदेश होने पर विरहन द्वारा उनके मनः स्थिति का वर्णन मिलता है | ननद भौजाई के बीच हसी-ठिठोली और पहाड़ीं संस्कृति में अच्छी फसल के लिए गया जाता है |

आपको बतादें  की उपशास्त्रीय गायक- गायिकाओं ने तो इस गीत को एक अलग ही पहचान दिया है |इस गीत को रागों में बांधकर क्षेत्रीयता की सीमा से बाहर निकालकर राष्ट्रीयता का दर्जा प्रदान किया |वही भारत रत्न से सम्मानित उस्ताद बिस्मिल्ला खान साहब की शहनाई पर तो कजरी और भी मिट्ठी हो जाती थी |इसी कड़ी मैं आइये नीचे कुछ पोपुलर कजरी से परिचय करवाती हूँ :-

  • हम त खेले जाइब सावन में कजरिया|Top Kajari Geet Lyrics In Hindi

मुखड़ा-

हम त खेले जइबो सावन में कजारिया बदरिया घिर आइल ननदी
हम त खेले जाइबो सावन में सावन में कजरिया बदरिया घिर आइल ननदी
कैसे खेले जईबु सावन में कजरिया बदरिया घिर आइल ननदी

अंतरा- तू त जात हऊ अकेली केहु संगे सखी ना सहेली
टु ता जात हऊ अकेली संघे सखी ना सहेली

छैला रोक लिहे-2 तहरों डगरिया बदरिया घिर आइल ननदी
कैसे खेले जाइब सावन में कजरिया बदरिया घिर आइल ननदी |

केतना करेलु गुमान होके चलेलु उतान –
केतना करेलु गुमान होके चलेलु उतान

तहरों नैना बाटे जुलमी कजरिया बदरिया घिर आइल ननदी
कैसे खेले जईबु सावन में कजरिया बदरिया घिर आइल ननदी

अइसन बोलत बाड़ू बोली जियरा लागे जैसे गोली
अइसन बोलत बाड़ू बोली जियरा लागे जैसे गोली

कैसे रोक लिहें हमरो डगरिया बदरिया घिर आइल ननदी
हम त खेले जाइब सावन में काजरिया बदरिया घिर आइल ननदी

यह भी पढ़ें :

  • तरसत जियरा हमार नैहर में |Top Kajari Geet Lyrics In Hindi

मुखड़ा  –

तरसत जियरा हमार नैहर में ,|
तरसत जियरा हमार नैहर में -4

अंतरा-

बाबा हठ किनों गवन नहीं दीनो
बाबा हठ किनों गवन नाही दीनों

बीत गई बरखा बाहर नैहर में
बीत गई बरखा बाहर नैहर में

तरसत जियरा हमार नैहर में …….
फट गई चुनरी मसक गई अंगिया

फट गई चुनरी मसक गई अंगिया
टूट गई मोतियाँ के हार नैहर में

तरसत जियरा हमार नैहर में
तरसत जियरा हमार …….. by शोभा गुर्टू

Top Kajari Geet Lyrics In Hindi

बारिश की दो छीटे देकर मन की प्यास बढ़ाते हैं
सावन हो या अपने साजन हाथ भला कब आते हैं |

मुखड़ा

सावन की फुहार पड़न लागे सखी री
सावन की फुहार ……….

अंतरा –

सारे गगरे गगरे गग रे रे सासा ,पनीसांरेगम गग ,रेमप रेमप रेमप

सावन की फुहार कारे कारे बदरा घिर घिर आए
मोरे आँगन में रस बरसाए ,ठन्ढि चलत बयार

पड़न लागे सखी री सावन की फुहार |

– सारे गगरे गगरे गग रे रे सासा ,पनीसांरेगम गग ,रेमप, रेमप रेमप

सावन की फुहार सावन की फुहार दादुर मोर पपीहा बोले
मोरे हिया में अमृत घोले तरपत जियरा हमार-2
पड़न लागे-2 सखी री सावन की फुहार …….

दोहा-

साजन हम तुम एक है कहने सुनन के दोय
मन को मन से तोलिए दो मन कबो ना होय-3,
सावन की फुहारसावन की फुहार

– सारे गगरे गगरे गग रे रे सासा ,पनीसांरेगम गग ,रेमप, रेमप रेमप

सावन की फुहार सावन की फुहार
झूला पर झूले, कजरी गावे

धानी चुनर तन पर लहरावे
हुलसत जियरा हमार पड़न लगे सखी री सावन की फुहार

नोट -उम्मीद है मेरे द्वारा प्रदान किए गए कजरी गीत से आप जरूर लाभान्वित होंगे |धन्यवाद

FAQ:

Q-कजरी गीत की उत्पति कहाँ से हुई ?

ANS- कजरी गीत पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक प्र्शिद्ध लोकगीत है |इसकी उत्पति मुख्य रूप से मिर्जापुर से मानी जाती है |मिर्जापुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक जनपद (Districk) है जो गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है | इसे वह के लोग वर्षा ऋतु में खूब गाते बजाते हैं |

Q-कजरी नृत्य क्या है ?

ANS- कजरी गीत बिहार का एक लोक नृत्य है | यह वर्षा ऋतु में में गया जाता है | इसके मधुर धुन रोम रोम को आनंदित कर है |जब इसके धुन कानो में पड़ता है तो अनायास पैर थिरकने को मजबूर हो जाते है | इसके मधुर धुन सुनकर जनमानस झूमने झूमने लगता है |

कजरी का मतलब क्या होता है ?

ANS- कजरी का मतलब होता है काले काले बादल | कजरी सावन के महीने में गाने वाला एक प्रकार का लोकगीत है, जो अति कर्ण प्रिय होता है | यह उत्तर प्रदेश और बिहार में मुख्य रूप से गया जाता है |

 

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