कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है ?
Why Krishna Janmashtami is Celibrated- कृष्ण जन्माष्टमी हिंदुओं का सबसे प्रमुख त्यौहार है |चौरासी लाख योनियों में मनुष्य जीवन ही सर्वोतम है |जिसे भगवान भी किसी न किसी रूप में धारती पर अवतार लेकर मनुष्य जीवन का आनंद लिए हैं | आइए जानते हैं कि कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है ?
ऐसा माना जाता हैं कि जब-जब धरती पर पाप बड़ा है तब-तब विष्णु हरी नें धरती पर अवतार लिया है और पापियों का मर्दन यानि संघार किया है | धरती को पाप के बोझ से मुक्त किया है |
Krishna Janmashtami-
ऐसा माना जाता है कि कृष्ण भगवान का जन्म भाद्र माह कृष्ण पक्ष रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी के दिन आधी रात को भगवान श्री हरी कृष्ण के रूप में देवकी के गर्भ से अवतरित हुवे| कृष्ण जन्माष्टमी की आगमन की तैयारियां कई दिनों पहले से ही शुरू हो जाती हैं | पूरे भारत वर्ष में लोगों के बीच इस पर्व को लेकर अति उत्साह रहता है | बच्चे बूढ़े सभी श्री कृष्ण के श्रद्धा भक्ति में डुबे रहते हैं | कृष्ण के जन्मोत्सव को देखने के लिए दूर दूर से लोग मथुरा पहूँचते है | भारत के अलावा विदेश से भी श्रद्धालु लाखों की संख्या में मथुरा कृष्ण जन्मोत्सव का दर्शन करने के लिए पहुँचते हैं | मथुरा के सभी मंदिरों को खास तरीके से सजाया जाता है |
जन्माष्टमी के पीच्छे की पूरी कहानी-
श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ था |भगवत पुराण के 10.3.1-3 इसका प्रमाण मिलता है| जैसे- श्रीशुक उवाच – हे परीक्षित! अब सभी गुणो से युक्त बहुत ही सुहावन समय आ गया है |रोहिणी नक्षत्र ,चारों दिशाएँ सवच्छ एवं प्रसन्न हैं |नदी का जल निर्मल ,वृक्षों की पतियाँ हरित , सरोवर के कमल,बागों के फूल ,पक्षियों का गुंजमान भौंरों का गुंगुनाना ,छोटे बड़े गाँव सभी हर्षित हैं | इस तरह कृष्ण भगवान के जन्म से सारा संसार मंगलमय था|
उस समय लंबे समय से कंस मथुरा का राजा था | वह देवकी का चचेरा भाई था | वह देवकी को गहरे दिल से प्यार करता था |वह देवकी को कभी उदास नहीं देख सकता था |जब देवकी की शादी हुई तो कंस बड़े धूम धाम से शादी में शामिल हुआ |शादी के बाद एक दिन वह अपनी बहन के घर जा रहा था| तभी आधे रास्ते में आसमान से आकाशवाणी हुई कि जिस बहन को तुम इतना प्यार करते हो वही बहन एक दिन तुम्हारी मृत्यु का कारण बनेगी | देवकी और वसुदेव का आठवा बच्चा तुम्हें मार डालेगा | जैसे ही उसने यह चेतावनी सुनी |अपने सैनिकों को भेजकर देवकी और वासुदेव को कारगार में बंद करवा दिया |इतना ही नही मथुरा के सभी जनता के साथ क्रूरता से व्यवहार करना शुरू कर दिया | उसने घोषणा कर दिया की देवकी के सारे बच्चों को मार डालूँगा |देवकी के पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवे,छठे, सातवें इस तरह सभी बच्चों को कंस ने मार डाला |
कारगार से वसुदेव जी कैसे ले गए ?
लेकिन जब देवकी अपने आठवें पुत्र के साथ गर्भवती हुईं तब प्रति दिन दोनों पति पत्नी दहशत में रहते थे|लेकिन भगवान विष्णु अवतार श्रीकृष्ण को कौन मार सकता |जैसे ही उनका जन्म हुआ | एक अलौकिक चमत्कार हुआ |कारगार के सभी दरवाजे अपने आप खुल गए और सभी रक्षक निद्रा के गोद में चले गए | कारागार में ही धीमी आवाज ने कृष्ण को बचाने की रास्ते को बताया |जिसे वसुदेवजी उसी आधी रात को कृष्ण जी को एक टोकरी में माथे पर लेकर शेषनाग की मदद से यमुना नदी को पार कर अपने मित्र नंदजी के पास छोड़ आए और बदले में नन्द बाबा की बेटी को लेकर वसुदेवजी कारागार में सुरक्षित पहुँच गए | सुबह होते ही कंस को खबर भेजवा दिया की देवकी को आठवी पुत्री हुई है |कंस अट्ठास करते हुवे आया और उस लड़की को पटक कर मारने की कोशिश की |परंतु वह लड़की कंस के हाथों से छुटकर अदृश्य हो गयी और आकाश से आवाज आई रे मूरख ! तुझे मरने वाला तो सुरक्षित स्थान में पल रहा है | जब तुम्हारा समय पूरा हो जाएगा तब वह तुम्हारा बद्ध कर देगा | इस तरह कृष्ण का जन्म अत्याचारी पापी कंस का बद्ध कृष्ण जी के हाथों हुआ |आइये एक भजन का आनद लें
भजन
जन्म लियो कृष्ण कन्हैया हो रामा
बधाइया बाजे मोरे अंगनाइया हो रामा
वासुदेव लेके चले गोकुल नगरिया
यमुना जी धन्य हुई छु के चारनियाँ
मगन भई यशोदा मैया हो रामा
जनम लियो ……………….|
नन्द जी लुटावेले द्वारे पर गइया
अंगना में कंगना लुटावें यशो मैया
बाजन बाजे सागरो नगरिया हो रामा
जनम लियो ……………………..|
अंगना में पालना पालना में ललना
कभी मुसकाए कभी झुलवेली पालना
गाओ रे सखी निशि आधी रतियाँ हो रामा
बधाइया ………………………………|
रचना -कृष्णावाती कुमारी
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