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Most Powerful 5 Snakes From Hinduism

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हिन्दू धर्म के सबसे शक्तिशाली 5 नाग |  Most powerful 5 snakes from Hinduism

हिन्दू महाकाव्यों के अनुसार आइये जानते है , Hindu Dharam ke Sabase Shaktishali Naag|हिन्दू धर्म के सबसे शक्तिशाली 5नाग |Most powerful 5 snakes from Hinduism

साथियों तक्षक ,शेषनाग वासुकि जैसे दिव्य नागो से आप भली भाति परिचित होंगे|मगर  हमारे धर्म ग्रन्थों में ऐसे कई महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख मिलता है जिसमें दूसरे कई नागों का वर्णन किया गया है |आज हम इस आर्टिकल में ऐसे ही कई शक्तिशाली नागों के बारे में जानेंगे | जिनमें 5 नागों के विषय में हम जानेंगे |

पद्म नाग

पद्म नाग का गोमती नदी के पास निमिस नामक क्षेत्र पर शासन था |बाद में ये मणिपुर में आकर बस गए |असम  में नाग वंसी इन्हीं के वंश से हैं  और आज भी भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में नागों की पूजा महत्वपूर्ण रूप से की जाती है|पद्म नागों को नागों की सबसे शक्तिशाली जतियों में से एक माना जाता है |ऐसा माना जाता है कि इनकी पूजा करने से विवाह संबन्धित दिक्कतें दूर हो जाती है |साथ ही किसी को सम्मोहन किसक्ति प्रपट करनी हो तो इनकी आराधना काफी लाभदायक होती है |

महापद्म

यह भी नाग जाति का ही सर्प है जो वासुकि,तक्षक ,कार्कोटकऔर पद्म आदि के कूल के हैं |विष्णु पुराण में सर्प के विभिन्न कूलों में महा पद्म का नाम भी आता है |पद्म और महापद्म कूलों में दोनों में आपस में बड़ा लगाव था |जब भी पद्म कूल किसी संकट में होता था ,तो महा पद्म उनकी सहायता के लिए आगे आ जाते थे |उसी तरह जब महापद्म के ऊपर कोई संकट आता था तो पद्म कूल भी उनकी सहायता के लिए आगे आ जाता था |

Most powerful 5 snakes from Hinduism

सुरगल

आपको को ज्ञात हो कि सुरगल वासुकि नाग के 19वे पुत्र थे और ये सुरगल बाबा के नाम से विख्यात हुवे|इनके जन्म के पीछे एक रोचक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है |कलियुग के प्रारम्भ में वासुकि देव ने माता नवल, माता  गेहरी और माता  कपूरी के साथ विवाह किए |लेकिन इन तीनों से कोई संतान नहीं हुई |एक दिन माता नवल ने पुत्र प्राप्ति की कामना लिए शिवजी की  तपस्या करने का निश्चय किया | उस दिन से माता  नवल शिवजी की  तपस्या करने लगी |12बारह साल की  घोर तपस्या के बाद जब शिवजी उनके सामने नहीं आए ,तो माता नवल एक लोहार की  दुकान पर गईं |लोहार से उन्होंने एक त्रिशूल बनाने के लिए कहा |इसके बाद वो उस त्रिशूल पर अपना पैर रखकर तपस्या करना शुरू कर दीं और वह  निश्चय कर लीं कि मई अपनी मृत्यु तक इस तपस्या को करूंगी |

इस कठोर तपस्या से भगवान शिव का आसन डोलने लगा | भगवान शिव वहाँ पहूँचे और उनसे वरदान मांगने के लिए कहा | तब माता नवल ने कहा: की हे! भगवन, मेरी और दो बहनें हैं ,उनको भी कोई संतान नहीं है |इसीलिए मैं पुत्रवती होने का वरदान चाहती हूँ |यह सुनकर भगवान शिव ने उन्हें एक फल दिया और कहा: की आप तीनों इसे खा लेना |कुछ समय बाद शिवजी के आशीवाद से माता नवल ने सुरगल और तल्लन को जन्म दिया |माता गेहरी ने बाबा पहाड़ को जन्म दिया,और माता कपूरी ने बाबा काई को जन्म दिया | जब सुरगल 12वर्ष के थे ,तब वो हरिद्वार गए| जहां इनकी मुलाक़ात एक सिद्ध बाबा से हुई|जिनका नाम था सिद्ध गोरैया नाथ और माता मल्ल|सुरगल और सिद्ध गोरया नाथ  दोनों मित्र बन गए और सुरगल ने मल्ल देवी को अपनी बहन बना लिया |उसके बाद सुरगल और सिद्ध गोरिया दोनों ने स्वांका के पास एक जगह पर तपस्या करना शुरू कर दिया | जो अब जो बीजापुर जम्बू में है |

धृतराष्ट्र-

धर्म ग्रन्थों के अनुसार धृतराष्ट्र वासुकि के पुत्र थे |महाभारत युद्ध के बाद जब युधिष्ठिर ने अश्वमेध यज्ञ किया तब अर्जुन और उनके पुत्र बबरुवाहन में बड़ा ही भयानक युद्ध हुआ था |इस युद्ध में बबरुवाहन ने अर्जुन को मार दिया था| परंतु जब बबरुवाहन को यह ज्ञात हुआ कि यदि संजीवनी मणि मिल जाय, तो अर्जुन के प्राण वापस आ सकते हैं |तब वह उस मणि की खोज में निकल पड़ा |वो मणि शेष नाग के पास थी और उसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उन्होने अपने पुत्र धृतराष्ट्र को सौपी थी |बबरुवाहन ने जब यह मणि उनसे मांगी तो, वे देने से माना कर दिये |जिसके कारण बाबरुवाहन और धृटराष्ट्र के बीच भयंकर संग्राम हुआ और बबरुवाहन ने धृटराष्ट्र से वो मणि छिन लिया |तब जाकर अर्जुन पुनर जीवित हुवे |

शंख-

नागों के आठ मुख्य कूलों में इनका भी एक विशेष स्थान है |माना जाता है कि शंखों पर जो धारियाँ होती हैं ,वह दरअसल इसी नाग के चिन्ह हैं |शंख नाग की जाति अन्य नागों कि तुलना में अति बुद्धिमान होती है |

कुलिक नाग जाति- 

नागों में यह जाति सबसे बढ़िया कूल की मानी जाती है|जिसमें अनंत नाग भी आते हैं |अन्य नागों की तरह इनके पिता भी कस्यप ऋषि थे |लेकिन इनके साथ सबसे बढ़िया खासियत यह थी कि इनका संबंध सीधे परम पिता ब्रहमा जी से माना गया है |शायद इसी लिए जनमेजय के नाग  यज्ञ की प्रतिज्ञा के बाद ये परम पिता ब्रहमा के पास ही चले गए |ये वो शक्तिशाली नाग थे , जिन्हें देवताओं की श्रेणी में रखा जाता था |इतना ही नहीं ,जिस प्रकार अग्नि- वंशी, चंद्र- वंशी और सूर्य- वंशियों को मान्यता रही है , उसी तरह नाग वंशियों की भी परंपरा रही है |महाभारत काल में नाग वंश के सदस्य काफी बड़े भू भाग में फैले हुवे थे |इतना ही नहीं कैलाश पर्वत से जुड़े हुवे क्षेत्रों में इनका प्रभुत्व ज्यादे था |

यह भी पढ़े:

1.द्रौपदी की सर्वप्रथम मृत्यु कैसे हुई ?

2.कृष्ण सहित कैसे खतम हुआ यदुवंश ?

3कृष्ण ने इरावण से विवाह क्यों किया ?

धन्यवाद पोस्ट अच्छा लगे तो ज्यादे से ज्यादे शेर करें |आप सभी का प्यार और टिप्पणी अपेक्षित है |

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