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Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh-गुरुनानक देव के अनमोल विचार

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 Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh|गुरु नानक देव के अनमोल विचार (अमृत वाणी,प्रेरणादायक उपदेश, वचन ,नानक देव की शिक्षा) Gurunanak Dev Inspiretional Quotes In Hindi,Teaching,thoughts 

By- K.Kumari

Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh- 5 साल के उम्र में गुरुनानक जी ने अपना प्रथम संदेश दिया था,जिसमें एक  ॐकार का नारा दिया|परमात्मा एक हैं,सभी से प्रेम करना चाहिए |निम्नवत आइये  Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh से अवगत हुआ जाय -:

1)अकाल पुरख =रब परमात्मा ,God ||

परमात्मा एक हैं | 1ॐकार, और गुरुवाणी हमें सिखाती है कि अकाल पुरख एक हैं, तू भी एक हो जा, सबको एक का हीं रूप समझ |

2)आदि सबु जुगादि सबु, है भी सबु नानक होसी भी सबु ||

वो रब हमसे पहले भी था, युगों युगों से था, अब भी है और हमारे बाद भी रहेगा!

3)जेता किता तेता नाउ,विणु नावै नाहीं को थाउ ||

अगर रब है तो वो कहाँ हैं ? गुरुजी कहते हैं कि तुम पुछते हो कि कहाँ है ? मैं कहता हूँ कि,वो कहाँ नहीं है |वो हर जगह है |यह सारा संसार उसका हीं बनाया हुआ है | सबमें वहीं हैं, मुझमें, तुममें, यह सब उसी का रूप है |

नानक देव अनमोल वचन| Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh

4) चुपै  चुप न होवई,जे लाई रहा लीव तार||

चुप रहने से मन शांत नहीं होता | गुरुजी कहते हैं कि लोग मन को शांत करने के लिए मौन धारण करते है,लेकिन यह कोई तरीका नहीं है, मूह को चुप करने का क्योंकि मुंह को चुप करने से मन शांत नहीं होता |

5)भूखीआ भुख न उतरी जे बना पुरिआ भार ||

तृष्णा भोजन इक्कठा करने से तृप्त नहीं होती है |यदि सारे भावनाओं के पदार्थों के ढेर भी संभाल ले, तो भी तृष्णा दूर नहीं होती| इससे तो तृष्णा और बढ़ जाती है |

6) साचा साहिब साचु नाइ भाखिआ भाउ अपारु ||Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh

परमात्मा की भाषा प्रेम है | नानक जी कहते हैं कि उस मालिक से यदि हमें बात करनी है तो पहले हृदय में प्रेम पैदा करें क्योंकि वो आपके दिल कि सुनता है आपके अलफाज जब दिल से मिलकर फरियाद करते हैं तो सुनी जाती हैं |

यह भी पढ़ें- APJ अब्दुल कलाम के प्रेरणादायक कोट्स 

7)थापिआ ना जाइ कीता न होइ,आपे आपि निरंजनु सोई ||Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh

परमात्मा कि ना कोई मूर्ति है और न कोई उसे बना सकता है |गुरु वाणी का फरमान है कि उसे कोई थाप नहीं सकता| उसे कोई बना नहीं सकता |वो तो सबको बनाने वाला है ,वो तो सबको पैदा करने वाला है |इसलिए उसे ना कोइ पैदा करने वाला है नहीं बनाने वाला है |

8)मति वीचि रतन जवाहर माणिक जे इक गुर कि सीख सुणी||

सबसे कीमती है गुरु कि सीख जो लाखों मोतियों से कीमती हैं | गुरुजी कहते हैं कि यदि मन लगाकर गुरु की एक भी सीख सीख ले तो वह किसी कीमती वस्तु से कम नहीं| गुरु की सीख प्रभु गुण सिखाती है और प्रभु गुण हीरे जवाहरातों जैसे बेसकीमती.. |

9)धरती होरु परै होरु होरु ||

इस धरती जैसे और भी धारतियां हैं| इस ब्रह्मांड में इस धरती जैसी अनेकों ही धरतियाँ  हैं |

गुरुनानकजी के अमृत वाणी |Guru Naanak Dev Ke  20 Updesh

10)पाताल पाताल लख आगासा आगास||

इन आकाशों  के ऊपर और भी लाखों आकाश हैं |नानक जी कहते हैं इसी तरह पतालों के नीचे और भी पाताल है |परमात्मा की दुनिया कितनी बड़ी है, यह केवल परमात्मा हीं जनता है | यह भी पढ़ें: कृष्ण के टॉप इन्सीपिरेशनल कोट्स 

11)करि करि वेखै कीता आपणाजीव तीस दी वडिआई ||

परमात्मा जगत को केवल पैदा हीं नहीं करता, बल्कि संभालता भी है |जितना बड़ा परमात्मा है ,वो उतना ही बड़ा जिगरे से जगत को रचके अपने पैदा किए हुए को संभालता भी है |

12) भरिए हथु पेरु तनु देह ,पाणी धोतै उतरसु खेह|

मूत पतीली कपडु होइ ,दे साबुणु लईए ओहु धोइ||

भरिए मति पापा के संगि,ओहु धोपे नावै कै रंगि ||

पापों से मलिन हुआ मन पभु प्रेम और प्रभु गुणों से साफ हो सकता है | नानक जी कहते हैं जैसे हाथ पाँव मेल हो जाएँ तो पानी से साफ हो जाते है ,कपड़ा गंदा हो जाय ,तो उसे साबुन से साफ किए जा सकते हैं |परंतु मन मैला होने पर साफ और सिर्फ प्रभु गुणों से उसे प्रभु के नाम से धोकर साफ़ किया जा सकता है |

13)आपै बीजि आपे हीं खहु ||Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh

इंसान जैसा कर्म करता है ,वैसा हीं फल खाता है | अर्थात जैसा कर्म करता है वैसा ही फल प्राप्त करता है |

14)केते लै लै मुकरू पाहि,केते मूरख खाही खाहि ||

दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जो परमात्मा का दिया हुआ खा पीकर नाशुक्रे बन जाते हैं |मगर कभी उसका शुक्राना नहीं करते |अनंत जीव परमात्मा का दिया खा तो लेते हैं पर दाता को याद नहीं रखते |परमात्मा को याद करने वाला सदैव सद्भाव और विनम्र होता है |सभी के साथ प्रेम करता है |  यह भी पढ़ें कृष्ण की 10 नीतियाँ

15) सुणीआ मनिआ मनि कीता भाउ ,अंतर गति तीरथ मलि नाउ||

सत गुरु की वाणी से मन साफ करना 68 तीरथों के समान है |जिसका मन गुरु की वाणी को सुनकर और गुरु के उपदेश मानकर मन में प्रेम पैदा हो जाय, उसने समझो सभी तीरथों का स्नान कर लिया है |

गुरुनानक जी के बेस्ट उपदेश |Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh

16)तिथि वारु ना जोगी जाणें रूठी माहु ना कोई | जा करता सिरसी कउ साजे,आपे जाणे सोई ||

यह संसार कब बना था उसका दिन क्या था, तिथि क्या थी ,सामय क्या था  इसके बारे में केवल प्रभु हीं जनता है |संसार कब बना इसके बारे में कोई जोगी कोई संत कोई महात्मा नहीं बता सकता |उसके बारे में सिर्फ अकाल पुरुख ही जनता है कि उसने कब संसार को सजा है |

17)समुन्द्र साह सुल्तान गिरहा सेतु मालु धनु ,कीड़ी तुलि ना होवनी जे तिसु मनहु न बिसही ||

जिसके दिल में आकाल पुरुख वास करता है वह बादशाहों क बादशाह है | दुनिया में जिसे कोई न जनता हो परंतु उसके दिल में प्रभु का नाम बसा हो तो वह परमात्मा की नजर में लाखों शाहनशाहों के बराबर है |

18) पवणु गुरु वाणी पिता ,माता धरती महतु||Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh

प्रकृति की रक्षा करें हवा पानी और पृथ्वी को स्वच्छ रखें | गुरु नानक जी हवा पानी की अहमियत बताते हुए कहते हैं कि जिसके बिना हम रह नहीं सकते ,हवा वो गुरु समान है |पानी पिता जैसा और धरती माँ जैसी है |जिसकी कोंख से सब पैदा हुए हैं तो साथियों इनसे प्रेम करो इन्हें गंदा ना करो |यह भी पढ़ें मोटिवेशनल कोट्स 

19) चंगिआईआ  बुरिआईआ वाचै धरमु हदूरी,करमी आपो आपणि के नेडै के दूरी ||

अपने कर्मों के हिसाब से कोई परमात्मा के पास है या कोई दूर |आपके करम हीं निर्धारित करते हैं कि आप प्रभु के पास हैं या दूर |परमात्मा आपके पैसे या आपके शोहरत से आपका हिसाब नहीं लगाता |वे तो आपके कर्म देखते हैं, कि आपने क्या कमाया है |

20)सोई सोई सदा सच साहिब साचा साचा साची नाई,है भी होसी जाय न जसई रचना जिन रचाई ||

हमेशा रहने वाला केवल परमात्मा है ,एक वहीं सच है जो सदा रहेगा | जिस अकाल पुरुख ने इस सृष्टि को पैदा किया है वह इस वक्त भी मौजूद है |वह सदैव रहेगा |ना वह जन्मा है, नहीं वह मरेगा |वह अकाल पुरुष सदा स्थिर है | वह इस वक्त भी मौजूद है |वह सदैव रहेगा | वह सर्वत्र है |वह सच्चा मालिक है |यह भी पढ़ें: राम के बाद लव कुश का क्या हुआ 

निष्कर्ष – यदि हम अपने जीवन में Guru Naanak Dev Ke 20 Updesh को अमल करते हैं तो सिर्फ अपने जीवन को सफल बना सकते हैं |

FAQ:

Q-गुरुनानक देव जी ने क्या संदेश दिया ?

ANS- गुरुनानक जी ने परमात्मा एक है,सर्वव्यापी हैं का संदेश दिया |सभी को एक दूसरे से प्रेम भाव और सत्य निष्ठा का पालन करना चाहिए | इसी में मानव का कल्याण और प्रगति है |

Q-गुरु नानक जी का क्या विचार है ?

ANS-नानक जी कहते है सभी इंसान को सबसे पहले अपने अंदर की बुराइयों से निजात पाना चाहिए |प्रत्येक व्यक्ति को सदैव विनम्रता पूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहिए | अहंकार मानुष्य के पतन का कारण होता है |इसलिए अहंकार त्याग देना चाहिए |

Q-गुरुनानक देव जी किसकी भक्ति करते थे ?

ANS- गुरु नानक देव जी कबीर दास की भक्ति करते थे |

Q-गुरु नानक जी ने शिष्यों से क्या लाने को कहा था ?

ANS- गुरु नानक देव जी शिष्यों से पानी लाने को कहा था क्योंकि भोपाल के रहने वाले गणपत लालजी कुष्ठ रोग से पीड़ित थे | जब वो एक पीर जल्लालुदिन के पास गए और अपनी बीमारी बताए तो, पीर ने कहा-गुरुनानक देव जी के पास जाओ | उनके शिष्य प्राकृतिक झरने से पानी लाये |नानक जी ने गणपत लाल के शरीर पर पानी छिड़का तो गणपत जी बेहोश हो गए |जब होश में आए तो नानक देव जी वह से जा चुके थे और गणपतलाल जी का कुष्ठ रोग ठीक हो गया था |

Q-गुरुनानक देव जी ने लंगर क्यों शुरू किया?

ANS- गुरुनानकजी के प्रवचन और यात्राओं से यह स्पष्ट होता है कि वे अपने श्र्द्धालुओं के साथ जमीन पर बैठकर खाना पसंद करते थे |उनके विचार में जाति-पाति उंच-नीच का कोई स्थान नहीं था | इन सभी रूढ़िवादिता को समाप्त करने के लिए लंगर शुरू किया ताकि सभी जाति धर्म के लोगों में में समानता |

 

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