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Naya Saal par kavita.

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Naya saal par Kavita  

सम्पूर्ण विश्व नूतन वर्ष  के इंतजार में 11 महिना गुजरने के बाद हर्षोल्लास के साथ अपने प्रियजनों के साथ घर से दूर जाकर सभी लोग न्यू ईयर मानते हैं I
कोई हिल स्टेशन जाता है, तो कोई होटल जाता है I कोई पार्क में  अपने परिवार के साथ पिकनिक मानता है I खासकर बच्चे अपने दोस्तों के साथ अत्याधिक मौज मस्ती करते है I बच्चों के बहाने बड़े भी काफी इंजॉय करते है l
1janwary को सभी हर्षित हो जाते है I अमीर हो या गरीब सभी को नूतन वर्ष से अपने समय बदलने का इंतजार रहता हैं I साथियो सभी वर्ग के व्यक्ति इस वक़्त को काफी इंजॉय करते हैं I 
नववर्ष कविता

 

    नववर्ष सबके जीवन में ख़ुशियाँ लाए l.इन्हीं कामनाओं के साथ मैंनें अपने विचार को कविता का रूप दिया है.
अत: अपना प्यार बनायें l

                  Peom

Nav varsh aapka ho sukhmay,
Nav varsh aapka ujjwal.
Nayen aayam mile jivan men,
Rangeen ho aapka har pal.

 

Khushiyon se shringar karen nit,
Khushiyan aapka ho gahana,
jivan ke har pal ko yaron,
Ji bharke Yun hi jina .

 

kabhi jivan men patajhad aaye,
kkabhi jivan men Bahar,
Jivan ke har pal ko yaron.
Karte rahna pyar.

 

Gujar gaya ek saal jivan se,
Raha ab kitna baki ?
Kaun jane kis aor se,
Kaisi kaun dikhaye jhanki.

 

Jivan ke Rangmanch par yaron,
 Sabhi kala mein mahir.
Apni apni hunar ko yaron,
Kar dena jag jahir .

 

Nutan ka hriday se aao,
Swagat karein ham milke.
Kami nahin rah Jaye kahin,
Kone mein kasak na dilke.

 

Nav varsh par kavita

nav varsh par kavita

कविता
नववर्ष पर

नववर्ष आपका सुखमय हो,
नववर्ष आपका उज्जवल।
नये आयाम मिले जीवन में,
रंगीन हो आपका हर पल।

          खुशियों से श्रींगार करें नित,। 
          खुशियां हो आपका गहना,
          जीवन के हर पल को यारों,
           जी भरके यूं जीना।

कभी जीवन में पतझड़ आता,
कभी जीवन में बहार,
जीवन के हर पल को यारों,
करते रहना प्यार।

          गुजर गया एक साल जीवन का,
          रहा अब कितना बाकी,
          कौन जाने किस ओर कहां से,
          कैसी दिखाये झांकी।

जीवन के रंग मंच पर यारों,
सभी कला में माहिर।
अपनी अपनी हुनर को यारों,
कर देना जग जाहिर।

             नूतन वर्ष हृदय से यारों,
              स्वागत करें हम मिलके।
              कमी नहीं रह जाये कहीं,
               कोने में कसक ना दिल के।

                              धन्यवाद पाठकों
                             रचना-कृष्णावती

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