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Jane Lataji ne kyon vivah nahin kiya

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Jane Lata ji ne vivah kyon nahin kiya ?

दोस्तों आइए हम जानते है वह राज क्या है जो आजीवन अविवाहित रहने के लिए  विवश कर दिया।

इनके पिताजी का नाम -दीनानाथ मंगेशकर। माताजी का नाम -शेवन्ती मंगेशकर।

लताजी का जन्म -२८सितम्बर१९२९, जन्म स्थान -इन्दौर। बहन मीनाजी,आशाजी,उषाजी।भाई हृदयनाथ मंगेशकर। भारत में  उपलब्धियां हम सभी जानते हैं।

सारी  दुनिया  इनके सुरों के कायल है। उद्दाहरण स्वरुप टाईम पत्रिका( अमेरिका) ने तो इन्हें पार्श्व गायन की सम्राग्यी स्वीकार किया है।

कहते हैं पहला प्यार और पहली नजर का ईश्क कभी भुलाया नहीं जा सकता। जिस तरह से दीदी की आवाज सबको दिवाना बना देती है। उसी तरह दीदी भी किसी की दिवानी थीं।

कम ही लोग जानते हैं कि उन्हें भी किसी से ईश्क था जिनके कारण लता जी आजीवन कुंवारी रहने का निर्णय लीं।

लता जी को ईश्क हुआ था एक महाराजा से, जो लताजी के भाई हृदय नाथ के दोस्त थें। अगर लताजी की शादी हुई होती तो आज दीदी एक राज्य की महारानी होती।

 

कभी स्कूल नहीं जाने वाली लताजी ने अपनी जिन्दगी से ही सारे सबक सीखीं। अपने भाई बहनों को पिता की कमी कभी महसूस नहीं होने दीं।

लताजी के उपर पूरे घर की जिम्मेदारी थी। भले ही दीदी अपने जुबान से कुछ नहीं कहें परन्तु विवाह नही करने के पीछे सच्चाई कुछ और ही है।

बच्चपन में कुंदनलाल सहगल की फिल्म चंडीदास देखकर लताजी कहा करती थी कि मैं बड़ी होकर सहगल से शादी करूंगी। लेकिन उन्होंने शादी नहीं की।

आज जो लताजी के जीवन से जुड़ी जो सच्चाई बताने जा रहीं हूं वह निम्नवत हैं।

लताजी के दिल को कौन भा गये थे? और उनके साथ शादी क्यों नहीं हो पाई?

यह व्यक्ति थे डोंगरपुर राज घराने  के महाराजा राज सिंह। राज सिंह जिनसे लता जी को प्रेम हुआ था। दोनों एक दुसरे को बेहद प्यार करते थे। राज सिह जब ला करने के लिए  मुम्बई आये।

इसी बीच हृदयनाथ मंगेशकर क्रिकेट  खेलने जाते हैं।   क्रिकेट खेलते समय राज सिंह और हृदयनाथ में अच्छी दोस्ती हो गई। एक दिन क्रिकेट खेलने के बाद अपने साथ हृदयनाथ अपने  घर चाय पर पर लेकर आये। 

तभी राज सिंह और  लताजी के प्यार का शुरुवात हुआ ।दोनों एक दुसरे को देखे। और फिर क्या राज सिंह जी का आना शुरु हो गया। यह सिलसिला बढ़ता गया। देखते ही देखते राज सिह और लताजी की दोस्ती हो गई।

आगे चलकर यह दोस्ती प्यार में बदल गई। तब तक लताजी का नाम भी चर्चित हस्तियों में आने लगा। इसी लिए मीडिया भी राज सिंह और लता जी को लेकर बाते उड़ने लगी थी।

राज क्रिकेट के शौकिन थे इसीलिए लिए कई सालों तक बी. सी. सी. आई से जुड़े रहे। शायद यही कारण है कि  लता जी  को भी क्रिकेट से प्यार था। राजजी और लताजी को मिलाने में क्रिकेट का बड़ा ही योगदान है।

राज लता जी को प्यार से मिट्ठू बुलाया  करते थे। अपने जेब में हमेशा एक टेप रिकार्डर रखा करते थे, जिसमें  लताजी के चुनिन्दे गाने हुआ करता था। मौका मिलते ही राज लताजी के गाने सुनने लगते थे ।

दोनों एक दुसरे से शादी करना चाहते थे। परन्तु कहा जाता है कि वो अपने माता पिता से वादा किये थे कि मैं किसी भी आम घर की लड़की को उनके घराने की बहू नहीं बनाउंगा।

राज ने अपना वादा मरते दम कर निभाया। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि राज भी लता जी की तरह आजीवन अविवाहित रहे। १२सितम्बर २००९ को राज सिंह का देहान्त हो गया और लता जी अपने गीतों के साथ अकेली रह गईं।

दोस्तों यह जानकारी अच्छी लगे तो अपने रिस्तेदारों और दोस्तों के साथ जरुर शेयर  करें।

           धन्यवाद दोस्तों 

         संग्रहिता-कृष्णावती

नोट- यह जानकारियां इंटरनेट पत्रिका पेपर से ली गई है।Read more : https://krishnaofficial.co.in/

 

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