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Jane Lataji Ne Kyon Vivah Nahin Kiya

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Jane Lataji Ne Kyon Vivah Nahin Kiya|लताजी की जीवनी 

Jane Lataji Ne Kyon Vivah Nahin Kiya- आखिर वह राज क्या है जो आजीवन अविवाहित रहने के लिए  विवश कर दिया।आज बहुत कम ही ऐसे लोग हैं जो अपने प्राण पर अड़े होते हैं |अब आइये एक एक करके इनके जीवन के विषय में निम्नवत जानते हैं |

    •  पिताजी का नाम -दीनानाथ मंगेशकर।
    • माताजी का नाम -शेवन्ती मंगेशकर।
    • लताजी का जन्म -२८सितम्बर१९२९,
    • जन्म स्थान -इन्दौर।
    • बहन मीनाजी,आशाजी,उषाजी।
    • भाई हृदयनाथ मंगेशकर।
    • भारत में  उपलब्धियां हम सभी जानते हैं।
    • मृत्यु -22 फरवरी 2022

सारी  दुनिया  इनके सुरों के कायल है। उद्दाहरण स्वरुप टाईम पत्रिका( अमेरिका) ने तो इन्हें पार्श्व गायन की सम्राग्यी स्वीकार किया है।

कहते हैं पहला प्यार और पहली नजर का ईश्क कभी भुलाया नहीं जा सकता। जिस तरह से दीदी की आवाज सबको दिवाना बना देती है। उसी तरह दीदी भी किसी की दिवानी थीं।

कम ही लोग जानते हैं कि उन्हें भी किसी से ईश्क था जिनके कारण लता जी आजीवन कुंवारी रहने का निर्णय लीं।

लता जी को ईश्क हुआ था एक महाराजा से, जो लताजी के भाई हृदय नाथ के दोस्त थें। अगर लताजी की शादी हुई होती तो आज दीदी एक राज्य की महारानी होती।

कभी स्कूल नहीं जाने वाली लताजी ने अपनी जिन्दगी से ही सारे सबक सीखीं। अपने भाई बहनों को पिता की कमी कभी महसूस नहीं होने दीं।

लताजी के उपर पूरे घर की जिम्मेदारी थी। भले ही दीदी अपने जुबान से कुछ नहीं कहें परन्तु विवाह नही करने के पीछे सच्चाई कुछ और ही है।

बच्चपन में कुंदनलाल सहगल की फिल्म चंडीदास देखकर लताजी कहा करती थी कि मैं बड़ी होकर सहगल से शादी करूंगी। लेकिन उन्होंने शादी नहीं की।

Jane Lataji Ne Kyon Vivah Nahin Kiya

आज जो लताजी के जीवन से जुड़ी जो सच्चाई बताने जा रहीं हूं वह निम्नवत हैं। लताजी के दिल को कौन भा गये थे? और उनके साथ शादी क्यों नहीं हो पाई |यह व्यक्ति थे डोंगरपुर राज घराने  के महाराजा राज सिंह। राज सिंह जिनसे लता जी को प्रेम हुआ था। दोनों एक दुसरे को बेहद प्यार करते थे। राज सिह जब ला करने के लिए  मुम्बई आये।

इसी बीच हृदयनाथ मंगेशकर क्रिकेट  खेलने जाते हैं।   क्रिकेट खेलते समय राज सिंह और हृदयनाथ में अच्छी दोस्ती हो गई। एक दिन क्रिकेट खेलने के बाद अपने साथ हृदयनाथ अपने  घर चाय पर पर लेकर आये। 

तभी राज सिंह और  लताजी के प्यार का शुरुवात हुआ ।दोनों एक दुसरे को देखे। और फिर क्या राज सिंह जी का आना शुरु हो गया। यह सिलसिला बढ़ता गया। देखते ही देखते राज सिह और लताजी की दोस्ती हो गई।

आगे चलकर यह दोस्ती प्यार में बदल गई। तब तक लताजी का नाम भी चर्चित हस्तियों में आने लगा। इसी लिए मीडिया भी राज सिंह और लता जी को लेकर बाते उड़ने लगी थी।

लताजी ने क्यों विवाह नहीं किया 

राज क्रिकेट के शौकिन थे इसीलिए लिए कई सालों तक बी. सी. सी. आई से जुड़े रहे। शायद यही कारण है कि  लता जी  को भी क्रिकेट से प्यार था। राजजी और लताजी को मिलाने में क्रिकेट का बड़ा ही योगदान है।

राज लता जी को प्यार से मिट्ठू बुलाया  करते थे। अपने जेब में हमेशा एक टेप रिकार्डर रखा करते थे, जिसमें  लताजी के चुनिन्दे गाने हुआ करता था। मौका मिलते ही राज लताजी के गाने सुनने लगते थे ।

दोनों एक दुसरे से शादी करना चाहते थे। परन्तु कहा जाता है कि वो अपने माता पिता से वादा किये थे कि मैं किसी भी आम घर की लड़की को उनके घराने की बहू नहीं बनाउंगा।

राज ने अपना वादा मरते दम कर निभाया। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि राज भी लता जी की तरह आजीवन अविवाहित रहे। १२सितम्बर २००९ को राज सिंह का देहान्त हो गया और लता जी अपने गीतों के साथ अकेली रह गईं। दीदी ने जिस तरह संगीत से प्यार किया उसी तरह अपने प्रेम से भी प्यार किया |ऐसे होते हैं सच्चे प्रेमी |प्रेम में त्याग होता है |प्रेम पूजा है आराधना है साधना है |

Biography Of Lata Langeshkar

 टूट गया सुर का माला ,रूठ गया ताल,भारत की सुर कोकिला लता मंगेशकर हमारे बीच नहीं रहीं|इसी साल जनवरी से ही कोरोना संकर्मण से ग्रसित थी| जिसके वजह से अस्पताल में भरती थीं | हफ्तों ICU में रहने के बाद 6फरवरी 2022 को दुनिया को 92 साल की उम्र अलविदा कह गई |

संगीत की बात करें तो,संगीत इनको विरासत में मिला था | उनके पिता का नाम दीना नाथ मंगेशकर था |वे भी अपने समय के एक एक बहुत बड़े गायक थे |वे थियेटर कलाकार भी थे |वे मराठी भाषा में संगीतमय नाटकों के निर्माता भी थे |लटजी जी अपने पांचों बहाई बहनों में सबसे बड़ी थीं |

आगे चलकर इनके सभी भाई बहन भी संगीत के क्षेत्र में दीदी का अनुसरण करते हुवे कदम रखा और मशहूर गायक बने |दीदी की लोकप्रियता इतनी थी की हर एल्बम दसों हजार में बिका करते थे |संगीत जगत और वॉलीवुड का जब उदय हुआ उसी समय फिल्मों में पार्श्वगायकों या प्लेबैक सिंगर्स की अहम भूमिका होती थी|

फिल्मों में अभिनेता और अभिनेत्रियाँ जब अभिनय करते थे तब गायक और गायिकाओं की आवाज पर्दे के पीछे से होते थे |लता मंगेशकर की बात करें तो फिल्मी संगीत करियर में आधी सदी से भी ज्यादे रहा |

जिसमें लताजी 36 भारतीय भाषाओं में 30 हजार से ज्यादे गाने गाये |कई दशकों तक लता मंगेशकर भारत की मशहूर और डिमांड में रहने वाली गायिका रहीं |सभी अभिनेत्रियों की ख़्वाहिश रहती थीं कि उनके फिल्मे गाने लताजी जी हीं गायें |

मुश्किलों भरा दौर 

एक बार कि बात है कि एक इंटरव्यू में अपने बचपन को याद करते हुवे बताया कि हमार परिवार शास्त्रीय संगीत से गहराई से जुड़ा हुआ था |हलोग फिल्मी संगीत को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे |लताजी को औपचारिक शिक्षा-दीक्षा नहीं मिली थी |

नौकरनी ने लताजी को मराठी अक्षरों की पहचान कराई थी|वहींसंस्कृत की शिक्षा उन्हें पास में रहने वाले पुरोहित जी ने दी थी |घर आने वाले रिश्तेदार और अध्यापक दूसरे विषयों का ज्ञान कराया |

लताजी का परिवार मुश्किलों के दौर से उस वक्त गुजरने लगा जब उनके पिताजी के काफी पैसे डूब गए और उन्हें अपनी थियेटर कंपनी को बंद करना पड़ा क्योंकि महाराष्ट्र के सांगली में स्थित पुश्तैनी घर को कर्ज भरने के लिए नीलम करना पड़ा |

जब उनके पिताजी की मौत हो गई उसके बाद लताजी अपने परिवार के साथ  मुंबई में सिफ्ट हो गई |अब परिवार की सारी ज़िम्मेदारी इनके कंधे पर आ गई |यह बात उस समय की है जब 1940 में फिल्मों में गाने की जगह कम होती थी |तब परिवार के भरण पोषण के लिए दीदी फिमोन में अभिनय करना शुरू कीं| कुल 8 मराठी और हिन्दी फिल्मों में एक्टिंग कीं |

1943 में पहली बार गजभाऊ फिल्म में कुछ लाइने और कुछ शब्द गए थे|1947 तक लताजी ने एक्टिंग से प्रतिमह 200 रुपये कामने लगीं |जबकि एक इंटरव्यू में नसरीन मुन्नी कबीर को बताया था कि मुझे अभिनय करना कभी से पसंद नहीं था |

लोगों का डायलोग बोलने का निर्देश देना मेकअप करना ,लाइटे इन सभी से बड़ी असहजता महासूस होती थी |एक बार तो एक निर्देशक ने बोला कि आप भौहे कतले क्योंकि आपकी भौंहे मोती है |तं दीदी को जबरदस्त सदमा लगा |लेकिन पापी पेट का सवाल था |लताजी को निर्देशक कि बात मनानी पड़ी थी |

  लताजी ने गायकी  में छोड़ी छाप 

अब गायकी कि बात करें तो फिल्म महल के लिए 1949 में अपनी पहली गायकी से लोगो के दिलों पर ऐसे राज करने लगीं कि उनके गाने जब तक धरती रहेगी तब तक सुने जाएंगे |हिन्दी फिमोन में हजाओं गाने गाये|जैसे पाकीज़ा ,मजबूर ,आवारा,मुगल-ए -आज़म श्री-420 आराधना और दिलवाले दुलहनियाँ ले जाएंगे, जैसी रोमांटिक फिल्मों में भी उन्होंने गाने गाये |

ब 1962 में चीन और भारत का युद्ध हुआ तब भारत के काफी जवान शहीद हो गये |उनके सम्मान में आयोजीत27 जनवरी  1963 के नेशनल स्टेडियम समारोह में जब लताजी ने ऐ मेरे वतन के लोगों नाम का गीत गया तो भारत के तात्कालिक प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू कि आंखो से आँसू निकाल आए थे |

प्लेबैक सिंगिंग में सभी प्रमुख गायकों के साथ लता जी ने गाने गाये और प्रमुख गायकों से ज्यादे रॉयल्टी बी मांगा और उन्हें मिला भी |लताजी ने एक बार अपने विषाय में कहा था कि आज मैं जो कुछ भी हूँ अपने मेहनत आए हूँ |मैंने अपने हक के लिए लड़ना सीखा है |मुझे किसी से दर नहीं लगता मैं निडर हूँ |लेकिन ये मुझे आज जितना मिला कभी मुझे मिलेगा 

कारों,क्रिकेट और कूत्तों का बहुत शौक था 

लता मंगेशकर दुनिया के मशहूर संगीतकारों, मोज़ार्ट, बिथोवन, शोपिन, नैट किंग कोल, बीटल्स, बारबरा स्ट्रीसैंड और हैरी बेलाफोंट के बनाए संगीत को सुनना पसंद करती थीं|

एक बार वो जर्मन मूल की अमरीकी अभिनेत्री मार्लिन डीट्रिख़ को स्टेज पर अभिनय करते हुए देखने के लिए विदेश तक गई थीं. उन्हें, स्वीडन की अभिनेत्री इनग्रिड बर्गमैन के नाटक देखना भी बहुत पसंद था|

लता मंगेशकर को फ़िल्में देखना भी अच्छा लगता था| उनकी सबसे पसंदीदा हॉलीवुड फ़िल्म थी-द किंग ऐंड आई. लता ने एक बार बताया था कि उन्होंने ये फ़िल्म कम से कम 15 बार देखी थी| उनकी दूसरी पसंदीदा हॉलीवुड फ़िल्म थी सिंगिंग इन द रेन|

लता को कारों का भी बहुत शौक़ था| ज़िंदगी में अलग-अलग मौक़ों पर उन्होंने भूरे रंग की हिलमैन और नीले रंग की शेवर्ले कार अपने पास रखी थी|

इसके अलावा उनके पास क्राइसलर और मर्सिडीज़ कारें भी हुआ करती थीं| घर में लता मंगेशकर ने नौ कुत्ते पाले हुए थे| वो क्रिकेट की भी बहुत बड़ी शौक़ीन थीं|

अक्सर वो रिकॉर्डिंग से ब्रेक लेकर टेस्ट मैच देखा करती थीं. लता बड़े शान से बताया करती थीं कि उनके पास सर डॉन ब्रैडमैन का ऑटोग्राफ़ है|खाना पकाना और फोटोग्राफ़ी करना उनकी हॉबी थी| शुरू में उनके पास रॉलिफ्लेक्स कैमरा था| छुट्टियों में वो जब अमरीका जाती थीं, तो वो रात-रात भर स्लॉट मशीन में खेला करती थीं|

अल्बर्ट हॉल में रेन ऑर्केस्ट्रा के साथ गाना

ता मंगेशकर को ख़ाली वक़्त में शास्त्रीय संगीतकार पंडित रविशंकर के स्टूडियो में चहलक़दमी करते हुए भी पा सकते थे| एक बार वहां उनकी मुलाक़ात, पंडित रविशंकर के दोस्त जॉर्ज हैरिसन से भी हुई थी, जो इंग्लैंड के मशहूर पॉप ग्रुप बीटल्स के मशहूर गिटार वादक थे|

1979 में लता मंगेशकर को ब्रिटेन के विश्व प्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में रेन ऑर्केस्ट्रा के साथ गाने का भी मौक़ा मिला था. ऐसा अवसर पाने वाली वो पहली भारतीय थीं|

लता मंगेशकर ने एक बार कहा था, ”मैं हमेशा ये मानती रही हूं कि ख़ुशी को दुनिया के साथ बांटना चाहिए, जबकि दुख को सदैव अकेले सहना चाहिए|”

लता मंगेशकर के गाए सदाबहार गानों से करोड़ों भारतीयों की ज़िंदगी में ख़ुशियां भरीं और जैसा कि नसरीन मुन्नी कबीर कहती हैं, ”लता के गाए गाने, करोड़ों भारतीयों की ज़िंदगी का संगीत बन गए|”

QNA

  • प्रश्न-लताजी अपने पीछे कितनी संपति छोड़ी हैं ?

उत्तर -लताजी अपने पीछे भारतीय रुपयों में बात करें तो 368 करोड़ होती है को छोड़ी है |यानि कि 368 करोड़ रुपये छोड़ी हैं |

  • प्रश्न-लता मंगेशकर की  कुल प्रॉपर्टी कितनी थी?

उत्तर-लता मंगेशकर की कुल प्रॉपर्टी की कीमत 50मिलियन डॉलर के आस पास है |यह जानकारी trustednetworth-com की एक रिपोर्ट के मुताबिक |

  • प्रश्न-लताजी ने कितनी भाषाओं में कितनी गाना गाईं हैं ?

उत्तर-लता मंगेशकर जी ने36 भाषाओं और  50 हज़ार से अधिक गाने गायें हैं |

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 धन्यवाद दोस्तों 

         संग्रहिता-कृष्णावती

नोट- यह जानकारियां इंटरनेट पत्रिका पेपर से ली गई है।Read more : https://krishnaofficial.co.in/

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