- Advertisement -
HomePauranik kathaRam ke baad Lav Kush ka kya huwa

Ram ke baad Lav Kush ka kya huwa

- Advertisement -

 Ram ke baad Lav Kush ka kya huwa | जाने राम के बाद लव कुश का क्या हुआ?

 Ram ke baad Lav Kush ka kya huwa- दोस्तों, आज  दुर्दशन पर  रामानंद सागर जी की जो  रामायण सीरियल चल रही है, कि राम ने कैसे लक्ष्मण का त्याग किया! लक्ष्मण ने कैसे जल समाधि ली!

इसके बाद राम ने भी जल समाधि लेने का निर्णय किया। रामजी के साथ उनके भक्त भी सरयू जी में  जल समाधि लेकर मोक्ष प्राप्त का अवसर प्राप्त किये।

रामानंद सागर जी के रामायण का यहां अंत हो जाता है।परन्तु इसके बाद क्या हुआ जन मानस में अधिक जानकारी नहीं है। इसपर अधिक बात भी नहीं होती है। राम के बाद  अयोध्या का क्या हुआ!

लव कुश के बाद अयोध्या के सुर्यवंशियों की वंशावली कैसे और कहां तक आगे बढी! राम का वह कौन सा वंशज जिसने महाभारत की युद्ध में कौरवों की सेना का साथ दिया था।

क्या वर्तमान में राम का कोई वंश का अस्तित्व है या नहीं दोस्तों ऐसे तमाम सवालों का जवाब इस पोस्ट में आप सभी को मिलेगा।राम की वंशावली कैसे आगे बढ़ी, इससे पहले हमें यह जानना जरुरी है कि राम के पूर्वज कौन थे? इसी लिए सबसे पहले आज आप सभी को राम के वंशजों से मुलाकात कराना चाहूंगी।

ब्रहमाजी के दस पुत्रों में से एक मारीची थे।

मारीची के पुत्र हुए कश्यप। कश्यप के पुत्र हुए विवस्वान।जिनका दुसरा नाम सुर्य भी है। दोस्तों यहीं कारण है कि यहा से राम के वंशज को सुर्यवंशी भी कहा गया है।

विवस्वान के पुत्र हुए  विवस्वान मनु। विवस्वान मनु के पुत्र हुए इश्वाकू । दोस्तों इश्वाकू सूर्य वंश के  पहले  राजा माने जाते है। इसी कारण इस वंश को आगे से इश्वाकु  वंश भी कहा गया।

आगे बढ़ते है – इश्वाकु के पुत्र हुए कुक्षि। कुक्षि के पुत्र हुए विकुक्षि। विकुक्षि के पुत्र हुए बाण। इस तरह वंशावली बढ़ते बढ़ते भागीरथ तक पहुची। जी हाँ भागीरथ वही राजा जिन्होंने अपने तपोबल से माँ गंगा को पृथ्वी पर उतारा था।

इसके बाद भागीरथ के पुत्र हुए ककुत्स्थ। ककुत्स्थ के पुत्र हुए इश्वाकु वंश के महाप्राक्रमी और प्रतापी राजा रघु। चूंकि राजा रघु के शौर्य एवं प्रताप से ही आगे चलकर इस कुल को रघुकुल के नाम से भी जाना गया।

इसके बाद रघु के पुत्र हुए प्रवृद्ध। प्रवृद्ध के पुत्र हुए शंखण और शंखण के पुत्र हुए अज। इस तरह वंश बढ़ते बढ़ते अज तक पहुंचा। अज के पुत्र हुए दशरथ।

दशरथ के पुत्र हुए राम, लक्षमण,भरत,शत्रूघ्न। चूंकि राम सभी भाइयों में  बड़े थे इसलिए राजा बने। दोस्तों यहां मैं बता दूं कि राम कितने नम्बर के राजा थे, इतिहासकारों में  कई मतभेद है। एक पक्ष मारीचि से यह गिनती शुरू करता है तो दुसरा पक्ष इश्वाकु से।

परन्तु सुर्यवंशियों में इश्वाकु को प्रथम राजा माना जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि राम सुर्यवंशियों में 63 तिरसठवे क्रम के राजा थे।  इसके बाद हम सभी को पता है कि राम के दो पुत्र हुए लव और कुश।

आगे बढ़ने से पहले मैं यह बता दूं कि पुराणों में भरत लक्ष्मण और शत्रुघ्न के दो दो पुत्रों का जिक्र मिलता है।

Ram ke baad unke dono putron ka kya huwa

भरत के पुत्रों का नाम तक्ष और पुष्कर। लक्ष्मण के पुत्रों का नाम चित्रांग और चंद्रकेतु। शत्रुघ्न के पुत्रों का नाम सुबाहु और सुरसेन । जिन्हें शत्रुघाती के नाम से भी जाना जाता है।

बाल्मीकी रामायण में अयोध्या के विजयी उल्लेखों में से हमें ग्यात होता है कि उनके छोटे भाई भरत ने अपने नाना केकय राज अश्वपति के आमन्त्रण और उनकी सहायता से गंधर्वों के देश गंधार को जीता था।

भरत ने अपने दोनों पुत्रों को वहां का शासक नियुक्त किया। बाद में भरत के दोनों पुत्र तक्ष अपने नाम से  तक्षशिला नगरी बसाई  और पुष्कर ने पुष्करावती नगरी बसाई।

तक्षशिला वही जिसके बारे में हमें जानकारी है कि पाकिस्तान के रावलपिंडी जिले में है। प्राचीन भारत  में यह नगरी शिक्षा की प्रमुख केन्द्र मानी जाती थी। यहां के प्रोफेसर की सूचि में एक प्रोफेसर चाणक्य  भी थे। जी हाँ, इस नगरी को भरत के पुत्र तक्ष ने बसाया।

भरत के दुसरे पुत्र पुष्कर की बसाई गई नगरी पुष्करावती जिसको आज हम पेशावर के नाम से जानते हैं।

लक्ष्मण  के बडे़ पुत्र चित्रांगद को अंगद के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कारुपथ का राज सम्भाला जो आज हिमाचल प्रदेश में है। फिर अंगदिया नगरी बसाकर उसको अपनी राजधानी बनाई।

लक्ष्मण के दुसरे पुत्र चन्दर्केतु ने मल देश का राज सम्भाला जो आज गोरखपुर के आस पास है। उन्होनें भी चंद्रचक्र नामक एक नगरी बसाकर उसे अपनी राजधानी बनाई।

शत्रुघ्न के बड़े पुत्र सुबाहु ने आगे चलकर मथुरा का राज सम्भाला और इनके दुसरे पुत्र सुरसेन भेलसा यानि आज का विदिशा का शासन सम्भाला।

मित्रों अब हम फिर एक बार राम की वंशावली की ओर रूख करते है। यहां राम के मृत्यु के साथ ही हिन्दू धर्म के जो चार युग है, उसमे से त्रेता युग की समाप्ति हो जाती है।

राम ने पृथ्वी छोड़ने से पहले लव को उतर कौशल का राज्य दिया। कुश को दक्षिण कौशल का राज्य दिया। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार लव ने लवपुरी नगर की स्थापना की,जो वर्तमान में पाकिस्तान का लाहौर शहर है।

यहां आज भी एक किले में लव का मंदिर बना हुआ है। फिर लव के वंशज गुजरात चले गए और मेवाड़ के राजस्थान में आकर बस गये। यहां इन्होंने सिसौदिया वंश की स्थापना की।

शायद आज यही कारण है कि मेवाड़ का राज प्रतीक सुर्य है। लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ। जिसमें बड़गुरजर जयास और सिकरवारों का वंश चला। दुसरी शाखा सिसौदिया राजपूत वंश थी। जिनमें बैछला यानि बैंसला और गैहलोत कोहिल वंश के राजा हुए।

दुसरी ओर कुश ने कुशावती नगर की स्थापना की,जो छतीसगढ़ राज्य के विलासपुर जिले में है। कुश ने अपना राज्य पूरब के तरफ भी फैलाया। तत्पश्चात एक नागवंश कन्या के साथ विवाह किया।

ऐसा माना जाता है कि थाईलैंड के राजा उसी नागवंश के वंशज है। शायद इन्ही कुछ कारणों से आज भी थाईलैंड के राजा को राम की उपाधि देने की प्रथा यथावत् है।

कुश से कुशवाहा यानि कछवा राजपूतों का वंश चला। इसके अलावा मौर्य सैनी साक के सम्प्रदाय की स्थापना कुश के ही वंश से हुई,ऐसा माना जाता है।

जे पी मितल के History of Ancient India  के मुताबिक कुश की मृत्यु दुर्जय नामक एक असुर से युुुुद्ध करते हुई ।

इसके अलावा ऐसा कहा जाता है कि लव और कुश में से कुश का ही वंश आगे बढा़ इसी कारण इतिहास में भी कुश के ही वंशजों का वर्णन है। आगे बढ़ते है ,कुश के पुत्र हुए अतिथि। अतिथि के पुत्र हुए निषाद। निषाद के पुत्र हुए नल। नल के बाद हुए नभ और इस तरह वंशावली बढ़ते बढ़ते आ पहुंची महाभारत काल के राजा वृहदबल तक। 

इतिहास में बृहदबल का जिक्र कुश की (50) पचासवी पीड़ी के रुप में होता है। वे कुरूक्षेत्र के युद्ध में कौरवों की ओर से युद्ध लडे़ थे ।

इस चक्रव्यूहु युद्ध में अभिमन्यु और वृहदबल के बीच घमासान युद्ध होता है। जिसमें अभिमन्यु के प्राण घातक तीर से वृहदबल की मृत्यु हो जाती है।

दोस्तों ,पुराणों में (३०) तीस दुसरे सुर्यवंशी राजाओं का भी जिक्र मिलता है जिसमें एक नाम राजा सिद्धार्थ यानि गौतम बुद्ध का भी है।

जी हाँ इसका मतलब की गौतम बुद्ध भी भगवान राम के ही वंशज थे। सुर्यवंश के अंतिम राजा के रुप में राजा सुमित को जाना जाता है। जिनको नंद वंश के स्थापक पद्मनंद ने हराकर अयोध्या को कब्जे में किया था।

यह समय कुछ ईशा पू  450से 362 के आस पास रहा होगा  ऐसा माना जाता है। दोस्तों आप सभी को ग्यात हो कि दिनांक  9.8.2019 की रोज शीर्ष कोट ने पूछा था कि  क्या राम के कोई वंशज है।   राम मंदिर केस के सुनवाई के दौरान राम के वंशजों को लेकर चर्चा ने जोड़ पकड़ा था।

जिसमें जयपुर  के राजपरिवारों में से दीया कुमारी भी इन्हीं में से एक है। दीया कुमारी ने एक पत्रावली के जरिए कुछ सबूत पेश किया। जिसपर अयोध्या के सभी  राजाओं का नाम क्रमानुसार लिखा हुआ था।

इसमें  राम के वंशज के रुप में 289वें वंशज  आमेर जयपुर के सवाई जयसिंह का नाम है। इसी क्रम में ३०७वें वंशज के रुप में दीया कुमारी के पिता महाराजा भवानी सिंह का नाम है

दीया कुमारी ने मीडिया के सामने अपने राम के वंशज होने का दावा मौखिक भी पेश किया। जिसका प्रमाण इस तस्वीर से स्पस्ट है। 

ram ke baad lav kush ka kya huwa
ram ke baad lav kush ka kya huwa

             धन्यवाद पाठकों

           संग्रहिता- कृष्णावती कुमारी

यह भी पढ़ें :

नोट – सभी जानकारियां नेट पत्रिका से संग्रह की गई है। यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो इसे अधिक से अधिक शेयर करें| 

Read more – https://krishnaofficial.co.in/

 

 

- Advertisement -
- Advertisement -

Stay Connected

604FansLike
2,458FollowersFollow
133,000SubscribersSubscribe

Must Read

- Advertisement -

Related Blogs

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Whatsapp Icon