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Poem on M S Dhoni Renunciation.

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 Poem on M S Dhoni Renunciationएमएस धोनी के सन्यास पर कविता 

Poem on M S Dhoni Renunciation – भारत को T20 कप जिताने वाले, वर्ल्ड कप 2011,और चैम्पियन ट्रॉफी जिताने वाले कप्तान MS Dhoni ने पूरे विश्व को अपने क्रिकेट सन्यास के निर्णय से निराश कर दिया हैं I

सभी क्रिकेट प्रेमी धोनी के इस निर्णय से हैरान हैं I किसी का दिल ये मानने के लिए तैयार नहीं है कि यह सच है I इस जांबाज के निर्णय के साथ ही क्रिकेट के एक युग का अंत होते प्रतीत होता है I ऐसा दर्द अब तक किसी भी क्रिकेटर के सन्यास पर महसूस नहीं हुआ है I

इनके कप्तान काल की बात करें तो, कठिन परिस्थितियों में धैर्यवान ,सुझ बुझ में माहिर, हर हार को जीत में बदल देने वाले कप्तान को मेरा नमन है I आप जैसा ‘न भूतो न भविष्यते ‘। आप की चुपी ऐसा नहीं कि कीसी को समझ नहीं आई |आप के सहन शीलता और धैर्य को भी सलाम |आप किसी भी परिस्थिति में अपने धैर्य को नहीं खोते हैं |यहीं आपकी खासियत हैं जो सबको बहुत भाता है |

Biography of MS Dhoni

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म और शुरूआती जीवन(Mahendra Singh Dhoni Birthday and Intial Life)

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म रांची, झारखण्ड (तब बिहार) में 7 जुलाई 1981 को हुआ था. महेंद्र सिंह धोनी के पिता का नाम पान सिंह धोनी एवं इनकी माता का नाम देवकी धोनी है. एम.एस. धोनी का एक बड़ा भाई और एक बहन भी है. धोनी के भाई का नाम नरेन्द्र सिंह धोनी तथा बहन का नाम जयंती है. धोनी एक मध्यमवर्गी परिवार से थे. उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा रांची के जवाहर विद्या मंदिर स्कूल से पूर्ण की. धोनी के पिता एक स्टील बनाने वाली कंपनी में काम करते थे.

धोनी को बचपन से ही क्रिकेट के बजाए फुटबॉल पसंद था पर, इनके कोच ठाकुर दिग्विजय सिंह ने इन्हें क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया. धोनी को फुटबॉल टीम में एक गोलकीपर के तौर पर खेलते थे. यही देखकर कोच ने उन्हें क्रिकेट में एक विकेट कीपर के तौर पर खेलने को कहा. धोनी ने अपने माता पिता की सहमती लेकर क्रिकेट खेलना शुरू किया. 2001-2003 में धोनी पहली बार कमांडो क्रिकेट क्लब की ओर से खेले वहां पर उनकी विकेट कीपिंग को देखकर सभी ने उनकी सराहना की. 2003 में धोनी ने खड़कपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन टिकट चेकर के तौर पर भी काम किया.

महेंद्र सिंह धोनी का प्रोफेशनल करियर (Mahendra Singh Dhoni Professional Career)

धोनी ने अपने प्रोफेशनल क्रिकेट करियर की शुरुआत सन 1998 में बिहार अंडर-19 टीम से की. 1999-2000 में धोनी ने बिहार रणजी टीम में खेलकर अपना पदार्पण किया. देवधर ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी और इंडिया “ए” में केन्या टूर में किये गए प्रदर्शन की बदौलत उन पर राष्ट्रीय टीम चयन समीति ने ध्यान दिया.

सन 2004 में एक टीम चयन समीति के बैठक में सौरव गांगुली से पुछा गया था कि टीम में विकेट कीपर किसे बनायेंगे? तब सौरव गांगुली ने कहा था कि “मैं एम.एस.धोनी को विकेट कीपर बनाना चहुँगा”. 2004 में धोनी ने बांग्लादेश के खिलाफ चिट्टगाँव में अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण किया तब से लेकर अब तक महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट में एक बहुत लम्बा सफ़र तय कर चुके है.

अपने क्रिकेटिंग करीयर में धोनी ने 90 टेस्ट में 4876 रन बनाये. टेस्ट में उनकी सबसे बड़ी पारी चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आई, इस पारी में धोनी ने 224 रन बनाये. टेस्ट में धोनी ने स्टंप के पीछे 256 कैच और 38 स्टम्पिंग की है.

वन-डे इंटरनेशनल में धोनी ने 347 मैचों में 10773 रन बनाये. धोनी ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ वन-डे पारी श्रीलंका के खिलाफ 2005 में जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेली, इस पारी में धोनी ने 183 रन की पारी खेली. वन डे में धोनी ने विकेट कीपिंग करते हुए 318 कैच पकड़े और 120 स्टम्पिंग की.

धोनी के नाम पर इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे तेज़ स्टम्पिंग का रिकॉर्ड भी है उन्होंने मिशेल मार्श की 0.76 सेकंड में स्टंपिंग की थी. अपनी बैटिंग, कीपिंग और फिनिशिंग के लिए धोनी विश्व जगत में मशहूर है. उन्होंने भारत के लिए हर आई.सी.सी. ट्रॉफी जीती, 2007 का टी-20 वर्ल्ड कप, 2011 का वन-डे वर्ल्ड कप, 2013 की चैंपियंस ट्राफी.

  • धोनी ने एक वन डे पारी में 10 छक्के मारे है, उनकी यह पारी सबसे ज्यादा छक्को के मामले में छठे स्थान पर आती है.
  • एम.एस. ने वन-डे में 183 रन बनाकर एडम गिलक्रिस्ट का विकेट कीपर के तौर पर सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड तोडा था.
  • भारतीय विकेट कीपर के द्वारा विकेट के पीछे सबसे ज्यादा शिकार करने का रिकॉर्ड भी धोनी के नाम ही है.
  • धोनी की कप्तानी में भारत अपने सर्वोच्च स्कोर 726 तक पंहुची थी.
  • धोनी एकमात्र कप्तान है जिन्होंने वन-डे में सातवें स्थान पर बैटिंग करते हुए शतक मारा था.
  • धोनी भारत के पहले विकेट कीपर है जिन्होंने टेस्ट में 4000 रन का आंकड़ा पार करा था. अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों को मिलाकर धोनी ने सर्वाधिक मैचों की कप्तानी की है.
  • धोनी की कप्तानी में भारत ने 199 वन-डे मैंचो में से 110 में जीत हासिल की है, टी-20 में 72 में से 41 में और टेस्ट में 60 में से 27 में भारतीय टीम ने जीत हासिल की है.
  • धोनी ने कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा टूर्नामेंट के फाइनल में जीत हासिल की है.
  • ये पहले भारतीय विकेट-कीपर है जिसने 300 वनडे कैच खेले है और विश्व के चौथे विकेट-कीपर है जिसने यह उपलब्धि हासिल की है.
  • वनडे में 200 छक्के मारने वाले पहले भारतीय और विश्व में पांचवें खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी है.
  • 6 वें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए वनडे करियर इतिहास में अधिकांश रन बनाने वाले खिलाड़ी का रिकॉर्ड भी इन्हीं के नाम है.
  • सिर्फ एक बल्लेबाज़ जिसने नंबर 7 की पोजीशन या उससे कम पर बल्लेबाजी  वाले केवल एकदिवसीय क्रिकेट में एक से अधिक शतक बनाने वाले खिलाड़ी (धोनी ने 7 वें स्थान पर 2 शतक लगाए हैं )

महेंद्र सिंह धोनी ने कब लिया सन्यास :

कल दिनांक 15 अगस्त 2020 को क्रिकेट जाबांज महेन्द्रसिंह धोनी द्वारा इन्स्टाग्राम पर संयास लेने की घोषणा से क्रिकेट प्रेमियों को बहुत बड़ा झटका लगा है। क्रिकेट प्रेमियों में उदासी का आलम छाया हुआ है। सारी दुनिया उनके इस निर्णय से आश्चर्य चकित हो गयी है

मेरी बेटी जबसे होश सम्भाली और धोनी को क्रिकेट खेलते हुए टेलिविज़न पर देखती थी तो खुशी से उछल जाती थी। मेरी बेटी खाना खाने में जहाँ नखरे करती थी वही धोनी को क्रिकेट खेलते हुए देखकर खाना कुछ ही समय में फीनीस कर देती थी।

मेरी बेटी मुझसे आकर बोली मम्मी एक बहुत असहनीय समाचार है। मैंने पूछा क्या है? उसने आखों में आंसू लिए बोला- एक दर्द से निकले नहीं, तब तक दुसरे झटके ने वार कर दिया।

क्या धोनी भैया एक बार भी नहीं सोचा, कि उसके चाहने वालों पर क्या गुजारेेगी ? अब मैं कैसे क्रिकेट देखूंगी। एम एस धोनी द Untold Story के किरदार निभाने वाले के दर्द में डूबे ही हैं। धोनी भैया मत संयास लीजिए। प्लीज आप अपना निर्णय बदल दीजिए। मुझे बहुत खुशी होगी | खुशी ही नहीं अपार खुशी होगी I 

इतना ही नहीं बुुढ़े जवान बच्चे-बच्चे तक धोनी जी के निर्णय से दुःखी हैं । आइए इनके  संयास के निर्णय पर अपने मन:स्थिति को  मैंने  एक छोटी सी कविता का रूप दिया है।आप सभी का प्यार अपेक्षित है —

कविता 

 सन्यास ना भाए तेरी ,जिया मानत नहीं मेरी  I 
क्यों छोड़ चला मैदा  जाबांज ?

क्यों मौन आवाज उसकी है आज ?

तेरे बिन सुना कृडांगन,

क्यों छोड़ चला अपना प्रांगण।

ना, तेरे जैसा कोई आया है,

ना, तेरे जैसा कोई छाया है।

आखिर वह कौन सी बात है?

तेरे जेहन में जो साथ है।

किस वज़ह से वो आए ना रास,

चाहने वाले तेरे,  सुन हो गए सारे हैं उदास।

जरा तनिक विचार किया होता,

प्रशंसक होके जिया होता।

हर घर घर में बच्चा बच्चा,

दादा दादी या चाची चाचा।

कोई आँगन बीच में रोवत है,

कोई बैठे खाट पर बोलत है।

तुझ बिन नाही कोई क्रिकेट मैच ,

तुझ जैसा ना खिलाड़ी का बैच।

तू दुलारा है तू प्यारा है,

जग के आखों  का तारा  है। 

थी इतनी भी क्या तुझे जल्दी ,

जो लिया कठोर निर्णय बेदर्दी ।

अभी उबरे नहीं है  घावों से,

छलियों के निर्मम दावों से |

कुछ दिन तो सब्र किया होता,

कुछ पल तो भार ढोया होता।

 बदलो  निर्णय उठाओ बल्ला।

  उठाओ बल्ला, उठाओ बल्ला,

  उठाओ बल्ला छलियों के निर्मम दावों से।

अब तनिक विचार करो लल्ला,

धन्यवाद पाठकों 

रचना-कृष्णावती कुमारी

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