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Poem on M S Dhoni Renunciation.

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 Poem on M S Dhoni Renunciation.

भारत को T20 कप जिताने वाले, वर्ल्ड कप 2011,और चैम्पियन ट्रॉफी जिताने वाले कप्तान MS Dhoni ने पूरे विश्व को अपने क्रिकेट सन्यास के निर्णय से निराश कर दिया हैं I
सभी क्रिकेट प्रेमी धोनी के इस निर्णय से हैरान हैं I किसी का दिल ये मानने के लिए तैयार नहीं है कि यह सच है I इस जांबाज के निर्णय के साथ ही क्रिकेट के एक युग का अंत होते प्रतीत होता है I ऐसा दर्द अब तक किसी भी क्रिकेटर के सन्यास पर महसूस नहीं हुआ है I
इनके कप्तान काल की बात करें तो, कठिन परिस्थितियों में धैर्यवान ,सुझ बुझ में माहिर, हर हार को जीत में बदल देने वाले कप्तान को मेरा नमन है I आप जैसा ‘न भूतो न भविष्यते ‘।

महेंद्र सिंह धोनी ने कब लिया सन्यास :

Poem on M S Dhoni Renunciation.

Poem on M S Dhoni Renunciation.

कल दिनांक 15 अगस्त 2020 को क्रिकेट जाबांज महेन्द्रसिंह धोनी द्वारा इन्स्टाग्राम पर संयास लेने की घोषणा से क्रिकेट प्रेमियों को बहुत बड़ा झटका लगा है। क्रिकेट प्रेमियों में उदासी का आलम छाया हुआ है। सारी दुनिया उनके इस निर्णय से आश्चर्य चकित हो गयी है

मेरी बेटी जबसे होश सम्भाली और धोनी को क्रिकेट खेलते हुए टेलिविज़न पर देखती थी तो खुशी से उछल जाती थी। मेरी बेटी खाना खाने में जहाँ नखरे करती थी वही धोनी को क्रिकेट खेलते हुए देखकर खाना कुछ ही समय में फीनीस कर देती थी।

मेरी बेटी मुझसे आकर बोली मम्मी एक बहुत असहनीय समाचार है। मैंने पूछा क्या है? उसने आखों में आंसू लिए बोला- एक दर्द से निकले नहीं, तब तक दुसरे झटके ने वार कर दिया।

क्या धोनी भैया एक बार भी नहीं सोचा, कि उसके चाहने वालों पर क्या गुजारेेगी ? अब मैं कैसे क्रिकेट देखूंगी। एम एस धोनी द Untold Story के किरदार निभाने वाले के दर्द में डूबे ही हैं। धोनी भैया मत संयास लीजिए। प्लीज आप अपना निर्णय बदल दीजिए। मुझे बहुत खुशी होगी I खुशी ही नहीं अपार खुशी होगी I 

इतना ही नहीं बुुढ़े जवान बच्चे-बच्चे तक धोनी जी के निर्णय से दुःखी हैं । आइए इनके  संयास के निर्णय पर अपने मन:स्थिति को  मैंने  एक छोटी सी कविता का रूप दिया है।आप सभी का प्यार अपेक्षित है —

कविता 

 सन्यास ना भाए तेरी ,जिया मानत नहीं मेरी  I 
क्यों छोड़ चला मैदा  जाबां ?

क्यों मौन आवाज उसकी है आज ?

तेरे बिन सुना कृडांगन,

क्यों छोड़ चला अपना प्रांगण।

 

ना, तेरे जैसा कोई आया है,

ना, तेरे जैसा कोई छाया है।

आखिर वह कौन सी बात है?

तेरे जेहन में जो साथ है।

 

किस वज़ह से वो आए ना रास,

चाहने वाले तेरे,  सुन हो गए सारे हैं उदास।

जरा तनिक विचार किया होता,

प्रशंसक होके जिया होता।

 

हर घर घर में बच्चा बच्चा,

दादा दादी या चाची चाचा।

कोई आँगन बीच में रोवत है,

कोई बैठे खाट पर बोलत है

 

तुझ बिन नाही कोई क्रिकेट मैच ,

तुझ जैसा ना खिलाड़ी का बैच।

तू दुलारा है तू प्यारा है,

जग के आखों  का तारा  है। 

 

थी इतनी भी क्या तुझेल्दी ,

जो लिया कठोर निर्णय बेदर्दी

अभी उबरे नहीं है  घावों से,

                                                  छलियों के निर्मम दावों से |

कुछ दिन तो सब्र किया होता,

कुछ पल तो भार ढोया होता।

 बदलो  निर्णय उठाओ बल्ला।

  उठाओ बल्ला, उठाओ बल्ला,

            उठाओ बल्ला छलियों के निर्मम दावों से।

अब तनिक विचार करो लल्ला,

धन्यवाद पाठकों 

रचना-कृष्णावती कुमारी

Read more:https://krishnaofficial.co.in/

 

 

 

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