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Grandparents Hindi Song

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Grandparents Hindi Song|गरंड पाइरेन्टस् गीत 

Grandparents Hindi Song– समाज में आज औसतन लगभग हर घर बड़े बुजुर्गों की सेवा में कमी देखने को मिलती है |बच्चे जब छोटे होते हैं तो माँ बाप के लिए लड़ते हैं कि माँ मेरी है ,माँ मेरी है |परंतु वहीं औलाद जब बड़ी हो जाती है तो ,बड़े होने का मतलब जब अपने परिवार में मगन हो जाते हैं तो, माँ बाप इगनोर होने लगते हैं |
कई लोग तो माँ बाप को आनाथाश्रम में छोड़ आते हैं |यहाँ तक कि रेलवे स्टेशन में भी छोड़ आते हैं | इसी भाव को मैंने अपने शब्दों में पिरोया है उम्मीद हा पसंद आएगा |
  

LYRICS

Aao sabhi dharti ko swarg banaye

Rachden nya itihas aaj re —- 2
Palko pe Dada dadi ko bithake
Rachden nya itihas
Aaj re……
Na koi bhakti h na koi puja
Dada dadi se badhke na koi duja
Aane na de kbhi inpe aanch
Ghar Ghar me alakh jagayen
Rachden……
Praat uthi naman Karein Dada dadi ko nana Nani ko
Maan dein sammaan dein dada dadi ko nana Nani ko
Vridhaashram ka mitadein naam
Aao milke muhim chalayein
Rachdein naya itihas aaj re
Aao sabhi dharti ko swarg banaye
Rachden………………

सत्य घटना आँखों देखी

आज बड़ा ही दुख से यह गीत मैं लिख रहीं हूँ | जब मैं गोरखपुर केवी एफ़सीआई में कार्यरत थी, तो एक राजपूत परिवार था |एफ़सीआई से सेवा निवृत होने के बाद अपने बेटा-बहू  के साथ बड़े ही प्यार से जीवन व्यतीत कर रहे थे|प्यार से सब  कुछ  रिटायरमेंट के बाद धनराशि मिली वो सबकुछ हड़प लिया|इतना ही नहीं  एक दिन ऐसा अचानक मोड़ छोडकर चला गया | पल भर में सब कुछ बादल गया |पोता दादा दादी से बहुत प्यार करता था |दादी दिनभर उसे इस घर से उस घर गोदी में  लेकर घूमती और खूब प्यार करतीं |लेकिन आज बेटा- बहू उन्हें छोड़कर गोरखपुर में ही हैं| लेकिन माता- पिता को बुढ़ापे में छोड़ दिया| जिसके चलते पिता अंगद सिंह कुछ ही दिनों में गुजर गए |परंतु माँ आज भी अपनी बहन के यहाँ गुजारा कर रहीं है |
हिन्दी में
ग्रेंड पेरेंट्स सॉन्ग
मुखड़ा –
आओ सभी धरती को स्वर्ग बनाएँ ,रच दें नया इतिहास आज रे -2
पलकों पे दादा दादी को बैठाके, पलकों पे नाना नानी को बैठाके |
रच दें नया इतिहास आज रे ,रच दें नया इतिहास |
अंतरा –
ना कोई भक्ति है ना कोई पूजा, दादा दादी से बढ़के ना कोई दूजा
ना कोई भक्ति है न कोई पूजा ,दादा दादी से बढ़के ना कोई दूजा |
आने ना दें कभी इनपे आंच घर घर में अलख जगाएँ |
रच दें नया इतिहास आज रे रच दें नया इतिहास |
प्रात उठी नमन करें दादा दादी को नाना नानी को
पार्ट उठी नमन करे दादा दादी को ,नाना नानी को
मान दें सम्मान दें दादा दादी को नाना नानी को
मान दे सम्मान दें दादा दादी को नाना नानी को
वृद्धाआश्रम का मिटादें नाम
आओ मिलके मुहिम चलाएं | रचदें  नया इतिहास आज रे-2

2 Grand Parents Song

 

मुखड़ा –

ना कोई तीरथ ना मक्का मदीना,

चारों धाम घर हीं है भैया मानलों,

चारों धाम घर हीं है भैया |

अंतरा –

*शिव रूप दादाजी पार्वती दादी ,

विष्णु रूप नानाजी,लक्ष्मी जैसी नानी |

सेवा में राम जाओ,सेवा मैंराम जाओ

होके दीवाना ,चरो धाम घर हीं है भैया मान लो -2

चारों धाम घर ही है भैया

 

*बरगद के छांव जैसे दादा दादी हैं

निमिया के ठाव जैसे नाना नानी हैं |

बरगद के छांव जैसे दादा दादी है

निमिया के ठाव जैसे नाना नानी हैं |

उंगली पकड़के चलना सीखना

चारों धाम घर हीं है भैया मान लो

 

*जब तक है हाथ सिर पे दादा दादी के
अबु अम्मी जॉन अमरजीत कौर नाम के
चर्च, मंदिर ,मस्जिद ,गुरुनानक दीवाना  |
चारों धाम घर हीं है भैया मानलों
चारों धाम  घर हीं है भैया |
Written by Krishnawati kumari
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