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Hindu Dharm ki Sundar Nariyan Kaun Kaun Kain

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Hindu Dharm ki Sundar Nariyan Kaun Kaun Kain|हिन्दू धर्म की सुन्दर नारियां कौन कौन थीं?

Hindu Dharm ki Sundar Nariyan Kaun Kaun Kain- जानें हिन्दू धर्म की सुन्दर नारियां – महिलाओं की सुंदरता की  बात आती है तो हमें हीरोइनों की ही याद आती हैl परंतु यहाँ हम उन हिरोइनों की बात नहीं कर रहे है lआज हम उन अति सुन्दर महिलाओं की बात करेंगे जिनकी सुंदरता का उल्लेख पौराणिक कथाओं में मिलता है साथियों आइए जानते हैं कि वह कौन कौन सी सुन्दर महिलाएं थी I जिनका उल्लेख हिन्दू धर्म के पौराणिक कथाओं में मिलता है—–

•1 मोहिनी-

मोहिनी
मोहिनी

समुंदर मंथन के समय निकले अमृत के लिए जब दैत्य और देवताओं में अमृत प्राप्त करने के लिए झगड़ा होने लगा I  तब श्री हरि विष्णु भगवान के मन में विचार आया और उन्होंने राक्षसों को चकमा देने के लिए एक अति सुन्दर नारी का रूप धारण कर समुद्र के बीच से प्रकट हो गए l

भगवन श्री हरि के इस मोहिनी रूप का वर्णन पुराणों में मिलता है I पुराणों में लिखी कहानी  के अनुसार इतनी सुन्दर महिला को देखकर राक्षस अमृत कलश को भूल गए और मोहिनी को निहारने लगे I

दैत्यों और देवताओं को तनीक भी भान नहीं हुआ कि इस सुन्दर नारी के रूप में श्री हरि है I दैत्य और देवता दोनो मोहिनी के रूप को निहारने लगे I दोनों मोहिनी के रूप पर मोहित हो गए l

इसीलिए दोनों में य़ह तय हुआ कि, मोहिनी ही दैत्यों और देवताओं को अमृत पिलाएं I तब मोहिनी को उचित अवसर मिल गया और मोहिनी ने छल से राक्षसों को जल यानि पानी पिलाया I दूसरी तरफ देवताओं को अमृत पिलाया I

कहा जाता है कि मोहिनी जैसी सुंदरता किसी भी महिला को आज तक प्राप्त नहीं हुआ l जब भी नारी सुंदरता की चर्चा होती है तो मोहिनी का उदाहरण जरूर दिया जाता हैl

•2 अहिल्या-

अहिल्या
अहिल्या

साथियों हिन्दू ग्रंथ के रामायण से बच्चा बच्चा परिचित है I परंतु बात जब पात्रों की आती है, तो भगवान राम, सीता,  लक्ष्मण,वीर हनुमान और रावण की ही यादें रह जाती है I मगर इस कहानी में कई ऐसे पात्र हैं जिनमें एक नाम आता है देवी अहिल्या  का I

अपने नाम के अनुसार ही इनकी कहानी भी विचित्र है I एक कहानी के अनुसार भगवान राम जब वन जा रहे थे उस समय एक पत्थर शीला से टकरा गए l पत्थर शीला से भगवान राम जैसे टकराये, वैसे ही उस पत्थर से एक अति सुन्दर महिला बाहर निकल आई I

इस महिला  का नाम देवी अहिल्या था I महर्षि गौतम की पत्नी देवी अहिल्या सुन्दर होने के साथ पति वार्ता स्त्री थी I पत्थर होने के पीछे देवराज इंद्र से जुड़ी एक कहानी है I एक बार देवराज इंद्र अहिल्या के सुंदरता पर मोहित होकर महर्षि गौतम का भेष धारण कर अहिल्या को पाने के लिए अहिल्या के साथ छल कर दिया l

महर्षि गौतम के वन में तपस्या के दौरान देवराज इंद्र अहिल्या के साथ रहने लगे I तपस्या के पाश्चात्य जब महर्षि गौतम अपने कुटिया में वापस लौटे,  तो देखा कि देवी अहिल्या किसी अन्य पुरुष के साथ है I

महर्षि गौतम क्रोधित होकर अहिल्या को उसी क्षण श्राप दे दिया कि  तत्क्षण  पत्थर की  हो जाओ I जब त्रेता युग में श्रीराम रूप में विष्णु अवतार होगा, तब उनके  चरण स्पर्श से आप पुनः नारी रूप में हो जाएगी I

•3 तिलोत्मा

तिलोत्मा
तिलोत्मा

साथियो किसी किसी को देखकर हृदय सहसा बोल उठता है कि क्या ईश्वर ने सुंदरता दी है I बड़ा फुर्सत में इन्हें बनाया होगा I सारी दुनिया की सुंदरता को इक्ट्ठा करके इस रचना को तैयार किया होगा I यह सुंदरी कोई और नहीं स्वर्ग की अप्सरा तिलोत्मा थी।

दरअसल सुन्द और उपसुन्द   दोनों राक्षस ने पृथ्वी लोक पर आतंक मचा रखा था। दोनो भाई  एक साथ रहते थे। दोनो भाई जब एक साथ रहते थे तो अति बलशाली हो जाते थे और तब उन्हे कोई हरा नही पाता था।

ब्रह्मा जी ने उनके भाई चारे को समाप्त करने के लिए अपनी अति सुन्दर रचना तिलोत्मा को धरती पर भेजा। ताकि तिलोत्मा दोनो भाईयो मेें फूट डाल सके और ऐसा ही हुआ।

•4 उर्वशी 

साथियो पुराणों में आकाश में रहने वाली अप्सराओं और धरती  पर रहने वाले मनुष्यों के बीच में बहुत सारी गाथायें परिचालित है I मेनका और विश्वामित्र, रम्भा और शुक्राचार्य इन्ही गाथाओ  का उदाहरण है I

मगर इन्हीं गाथाओं में एक कहानी महर्षि पुरुरवा और उर्वशी की है I कहानी के अनुसार देवराज इंद्र के दरबार में उर्वशी एक अफ़सरा थी I उर्वशी को स्वर्ग में रहते रहते बोरियत महसूस होने लगी I वह पृथ्वी पर रहने वाले लोगों के जैसे जीवन जीना चाहती थी l

एक दिन उसके मन में विचार आया कि क्यों ना कुछ दिन धरती पर जाकर समय व्यतित किया जाय I और उसने ऐसा ही किया l परंतु उसने पृथ्वी पर कुछ दिन समय बीता कर जब वापस स्वर्ग में लौट रही थीl

तब उसे बीच रास्ते में एक राक्षस ने पकड़ लिया और उसी समय उसे पुरुरवा ने उसे बचा लिया I राजा पुरुरवा से उर्वशी को प्यार हो गया I राजा भी उर्वशी के सुंदरता पर मोहित हो गए I अब उर्वशी राजा के साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताना चाहती थीl परंतु उर्वशी कुछ शर्तों में बधी हुई थी I

पहली शर्त- यह थी कि वह दो बकरियां लेकर आएगी और राजा का देखभाल करेगी I

दूसरी शर्त- य़ह थी कि वह सदा घि का सेवन करेगी I

तीसरी शर्त- यह थी कि वह दोनों एक दूसरे को नग्न अवस्था में नहीं देखेेंगे I केवल यौन संबंध बनाते समय ही देखेंगे I

जब देवताओं को पुरुरवा और उर्वशी के प्यार के बारे मे पता चला तो जलन से व्यग्र होकर उन दोनों को अलग करने का उपाय सोचने लगे I और चाल चलने लगे I एक रात गंधर्वों ने उर्वशी की बकरियां चुरा ली I

बाकियों के मे में की आवाज सुनकर उर्वशी को चिंता हुई I उर्वशी ने राजा को बकरियों को बचाने के लिए जल्दी से भेजा I  परंतु उस समय राजा निर्वस्त्र ही बचाने के लिए दौड़ गएI तब गंधर्वों ने राजा पर प्रकाश डाला l 

तत्पश्चात दोनो ने एक दुसरे  को नंगा देख लिया I जिसके कारण शर्तों को टूटने पर उर्वशी को पुनः स्वर्ग में लौटना पड़ा I

•5 दमयन्ती 

साथियो पुराणों में सिमटी कई कथाओं के अनुसार एक कथा विदर्भ देश के राजा भीम की पुत्री दमयन्ती और वीर सेन के पुत्र नल की भी है I जहां दमयन्ती दिखने में अति सुन्दर थी, वही नल के शक्ति की गाथा दूर दूर तक फैली थी I

दोनों एक दूसरे की इतनी तारीफ सुन चुके थे कि एक दूसरे को देखे बिना ही प्रेम करने लगे I जब दमयन्ती के स्वयंवर का आयोजन हुआ तो इंद्र, वरुण, अग्नि और यम चारों  नल के भेष में स्वयंवर में उपस्थित हो गए l

पांच पुरुषों को नल के जैसे देखकर दमयन्ती डर गई I परंतु उसके प्रेम में इतनी शक्ति थी की वह असली नल को पहचान गई  और दोनों की शादी हो गई l मगर दोनों ज्यादे दिन तक एक साथ नहीं रह पाए I 

नल अपने भाइयों से जुवे में सबकुछ हार गया और वन मे चला गया।दमयंती भी वापिस अपने पिता के घर चली गई। वन मे नल को एक साप काट लिया। जिससे उसका सारा शरीर काला पड़ गया। जिससे नल को पहचानना मुश्किल था। 

इधर दमयंती नल के तलाश मे दर दर भटकती रही। एक दिन दमयंती के सामने नल इस रूप में भी आया तब भी दमयन्ती नल को पहचान गई।

साथियों अजीब बिडम्बना है, महिलाओं का जीवन सदियों से खिलौने के रूप में ही प्रयोग हुआ है I चाहें वह कोई भी काल होI

Note-यह कहानी बुजुर्गों द्वारा मौखिक और पेपर इन्टरनेट के माध्यम से संग्रह किया गया है I
धन्यवाद साथियो
संग्र्हिता-कृष्णावती कुमारी
Read more –https://krishnaofficial.co.in/
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