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Poem On New Year नव वर्ष पर छंद कविता

Poem On New Year|नव वर्ष पर कविता 

Poem On New Year – वैसे तो विश्व में भारत एक ऐसा देश है जहां प्रति दिन, प्रति माह,  त्योहार के रूप में मनाया जाता है I यहां प्रत्येक दिन देवी देवता का होता है I यहां प्रत्येक प्रांत का एक अपना  महत्वपूर्ण  त्यौहार होता है I

यहां सभी धर्म के लोग अपने अपने त्योहार को अपने अपने तौर तरीकों से हर्षोल्लास से मनाते है I जैसे पंजाब की लोहड़ी, गुजरात की नवरात्री, बिहार का छठ पूजा, मुंबई का गणेश उत्सव,  असम का बिहू,झारखंड का कर्मा और केरल का  पोंगल ऐसे अनेकों त्योहार हमारे देश वासी मनाते  है |

परंतु पिछले कई वर्षो  से देखा जा रहा है कि हमारे भारत में भी पश्चिमी देशों के  रीति को बड़े चाव से अपनाया जा रहा है I जिसमें  न्यू ईयर और क्रिसमस को हमारे देश में सभी धर्म एवं उम्र के लोग बड़े धूम धाम से मनाने लगे हैं |

आप सभी को ज्ञात हो कि बच्चे अपने दोस्तों के साथ न्यू ईयर अपने ढंग से मनाते है I तो स्कूल जाने वाले बच्चे अपने अंदाज में मनाते हैं और  कालेज जाने वाले बच्चे अपने अंदाज में मनाते है |

इनकी अंदाज बड़ी ही निराली होती है | कई होटल में दोस्तों के साथ नाचते गाते नव वर्ष का लुफ्त उठाते हैं, तो कई अपने साथियों के साथ रिसॉर्ट में मस्ती करते नजर आते है | 

वहीं बड़ों की बात की जाय तो ऑफिस जाने वाले अपने साथियो के साथ अलग अंदाज में  न्यू ईयर का जश्न मानते है I दूसरी तरफ घरेलू  महिलाओं की बात करे तो वह भी किसी से कम नहीं,  किटी पार्टी में अपनी सहेलियों के साथ न्यू ईयर का लुफ्त  उठाती हैं I
अब मैंने अपनी भावनाओं को अपने शब्दों में बाध कर कविता का रूप दिया है उम्मीद है, आप सभी को पसंद आएगा I आप सभी का स्नेह और आशीष  अपेक्षित है I 

कविता Peom/Poem On New Year

आया नूतन वर्ष नया दिन,

आई रात नवेली  I

आस यही सबके मन भीतर ,

किस्मत अब बदलेगी I

 

Aaya nutan varsh naya din,

aai raat naveli.

aas yahi sabke man bhitar,

kismat ab badalegi.

 

कोमल धूप लिपटे हैं तन से,

पूस माघ की छैया ।

ख़ुदा करें य़ह नूतन वर्ष,

ले जाए सबकी बलैया I

 

Komal dhup lipte hai tan se,

pus magh ki chhaiya.
Khuda kare yah nutan,
Le jaye sabki balaiya.
चटक चटक कर सरसो फूले ,

खलिहानों में बिखरे I

बगिया से फूलों की खुशबू,

धरा से गगन तक पसरे I

 

Chatak chatak kar sarso phule,

Khalihanon mein bikhre.

Bagiya se fulon ki khushboo,

dhara se gagan tak pasare.

 

मन की आशा पूरी हो,

गम कभी पास ना आए I

इस जीवन की बगिया को

प्रभु सुख से सदा सजाएं I

 

Man ki aasha puri ho,

gam  kabhi paas na aaye.

Is  jivan ki bagiya ko,

Prabhu sukh  se sada sajayein.

 

नूतन वर्ष  में सोच नई हो,

पहल नई हो,जीवन पथ का मार्ग सरल हो I

जो अनसुलझी रही पहेली,

हे प्रभु अब उसका भी हल हो I

 

Nutan varsh mein soch nai ho,

Pahal nai ho,jivan path ka marg saral ho.

Jo ansuljhi rahi paheli,

He prabhu ab uska bhi hal ho 

 

वहीं सफल होता है जग में,

 साथ जो वक्त के चलता है I

मंजिल भी उसी को मिलती,

जो कर्म पथ पर अटल होता है I

 

Vahin safal hota hai jag mein,

Saath jo vaqt ke chalta.

Manjil bhi usi ko milati,

Jo karm path par atal hota hai.

 

हे नव वर्ष के उगते सूरज,

तनीक तेज अपना दे देना I

जल जाए सब व्याधि तेज से,

ऐसा पल सब जन को देना I

 

He nav varsh ke ugte suraj,
Tanik tej apna de dena.
jal jayen sab vyadhi tej se,
aisa pal sab jan ko dena.

 

नूतन वर्ष में नई उम्मीदें,
जन जन के हृदय में  होता I
सुख समृद्ध वैभव मिले सबको,
स्पन्दन बीच लगे गोता I

 

Nutan varsh mein  nai ummiden,

Jan jan ke hriday mein hota.

Sukh samriddhi vaibhav mile sabko,

Spandan bich lage gota.

 

नव वर्ष मंगलमय हो,

रहे जीवन सबका सुखमय I

र्ष्या द्वेष से स्वच्छ हो सब तन,

रहे स्वस्थ जीवन तन मय।

 

Nav varsh mangslmay ho,

Rahe jivan sabaka sukhmay.

Irshya dwesh se swachchh ho sab tan,

rahe swasth jivan tanmay.

 

नव वर्ष  रहे मंगलमय,

नववर्ष रहे मंगलमय,

नववर्ष रहे मंगलमय।

 

nav Varsh  rahe mangalmay.

Nav Varsh rahe mangalmay.

Nav Varsh rahe mangalmay.

 

2.कविता Poem on new year

साल में दिन, तिनसौ पैंसठ होते  ,

धीरे धीरे दिन बीत जाए|

पर दुख के छड़ पल पल भैया,

बहुते हमें सताये|

 

इसी आस से दिन बिता जाते,

आये नया साल,

कहीं कोई रोशनी दिख जाए,

करदे मलामाल|

 

जनवरी धीरे कदम बढ़ाए,

फरवरी फुर फुर जाए|

मार्च खड़ा है सीना ताने

अप्रैल है टांग फैलाये|

 

मई जून लंबा खींच जाए,

जुलाई अगस्त बाज़ न आए|

सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर ,

ये भी अंतिम चरण में आए|

 

गाल बना सेव कश्मीरी ,

खुशियाँ ऐसे छाए |

आया नया साल है यारों,

मन मस्त मगन बलखाये |

 

हैप्पी हैप्पी न्यू इयर,

सब उल्लास से गाये|

जो बीत गई सो बात गई,

प्रेम से हाथ मिलायें |

 

कहीं झुंड में पिकनिक मनता,

कहीं गेम खेला जाए |

कहीं गीत संगीत सम्मेलन,

कहीं गुणिजन राग सुनाएँ |

 

कहीं ढ़ोल नगाड़ा बाजे,

कहीं नृत्य मन भाए|

कोई सिनेमा देखन जाएँ

कोई घर हीं मौज मनाए|

 

नई उमंग नाय उत्साह,

नयनन बीच समाये |

शायद यह नव वर्ष हजारों….

खुशियाँ खुशियाँ लेकर आए |

 

अंत हो नकारात्मक का ,

सकारात्मक मन हो जाए |

कब तक पग दुख फैलाएगा ,

सुख नव वर्ष ले आए |

 

हर्षित हिया में प्रभु बसत हैं,

कर्मठता अपनाएँ |

जो नर कर्म पर करे भरोशा,

भाग्य भी शीश झुकाये|

 

अंत में हे प्रभु! सबकी झोली,

खुशियों से भर देना |

जैसे खुश रहे 1जनवरी को,

सब दिन ऐसे रखना|

 

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Poem on new year

Sal mein din tin sau painsath hote,
Dhire dhire bit Jaye.
Par dukh ke chhad pal pal bhaiya
Bahute hamen sataye.

 

Isi aash se din bit jate,
Aayega naya sal.
Kahin koi raushni dikh jaye,
Karde mala maal.

 

Janvary dhire kadam badhaye,
Farvary fur fur jaye.
March khada hai Seena tane,
April Taang failaye.

 

Maii Jun lamba khinch jaye,
Julai agast baz na aaye.

Sitambar aktubar navambar disambar
ye bhi antim charan men aaye.

 

Gaal Bana Sev kashmiri
Khushiyan aise chhaye.

Aaya naya saal hai yaron,
Man mast magan balkhaye.

 

Happy happy happy new year,
Sab ullas se gaye.

Jo bit gai so baat gai,
Prem se hath milayein.

 

Kahin jhund mein piknik manta
Kahin gem khela jaye.

Kahin geet sangeet sammelan
Kahin gunijan raag sunayein.

 

Kahin dhol nagada baje,
Kahin nritya man bhaye.

Koi sinema dekhan jaye,
Koi gharhin mauz manayen.

 

Nayi Umang naya utsah,
Nayanan bich samaye.

Shayad, yah nawvarsh hazaron,
Khushiyan lekar aaye.

 

Ant ho nakaratmak ka ,
Sakaratmak man ho jaye.

Kab tak pag dukh failayega?
Sukh nawvarsh le aaye.

 

Harshit hriday mein prabhu basat hain,
Karmathata apnayein.

Jo nar karm par kare bhroshaa,
to Bhagy bhi shish jhukaye.

 

Ant mein he Prabhu! sabki jholi,
Khushiyon se bhar Dena,

Jaisi khushiyan ek janwary ko,
Sab din aise rakhna.

 

Dhanybad doston
Rachna–Krishnawati kumari

 

FAQ:

Q- न्यू इयर क्यों मानते हैं ?

ANS- 1 जनवरी को न्यू इयर मनाने की शुरुवात 15 अक्तूबर 1582 से हुई | इससे पहले न्यू इयर कभी 25 मार्च को मनाया जाता था ,तो कभी 25 दिसंबर को मनाया जाता था | लेकिन रोम के राजा नूमा पोंपिलस के रोमन कैलेंडर में बदलाव करने के बाद जनवरी महीने को साल पहला महीना माना गया। इससे पहले मार्च को साल का पहला महीना कहा जाता था।

Q-कौन से देश में सबसे पहले नया साल मनाया जाता है ?

ANS- संसार में सर्वप्रथम न्यू इयर आईलैंड/ किरीबैती में न्यू इयर का भावी तरीके से स्वागत किया जाता है |यहाँ भारतीय समयानुसार 31 दिसंबर की शाम 3:30 बजे न्यू इयर मानना शुरू हो जाता है| साथ हीं भारतीय साम्यनुसार 4:30 औस्ट्रेलिया ,न्यूजीलैंड,और रूस के कुछ भाग में न्यू मनाना प्रारम्भ हो जाता है |

Q-नए साल का आखिरी कौन मनाता है ?

ANS- नए साल का आखिरी अमेरिकन समोआ 2023 का स्वागत करने वाला अंतिम स्थानों में से एक होगा!

नोट -मेरी  कविता पसंद आए तो अपने साथियों,पड़ोसियों और परिवार जनों के साथ शेयर करें ताकि हमारा मनो बल बढ़ता रहे I

Note- meri poem pasand aaye to apne sathiyon, padosiyon aur apne pariwar  janon ke saath share karen .isase hmara manobal,badhta hai.motivation milta hai. Thanks 

 

धन्यवाद- साथियों
रचना- कृष्णावती कुमारी 

 

 
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