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Avni Lekhara Wins Gold in Paralympics 2021

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Avni Lekhara Wins Gold in Paralympics 2021|अवनी लेखरा ने जीता परालंपिक में स्वर्ण पदक 

भारत माँ की बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं है |अवनि लेखरा ने जीता टोकियो पैरालंपिक में स्वर्ण पदक |आज भारत का परचम  इन बेटियों की वजह से हर क्षेत्र में लहरा रहा है | भारत का शूटिंग में यह प्रथम गोल्ड मेडल है |आइये जानते है कि यह उपलब्धि क्यों खास है|

मुख्य-

  • अवनी ने जीता गोल्ड टोकियों पैरालम्पिक में
  • भारत का प्रथम गोल्ड टोकियो पैरालम्पिक में

मंजिल उन्हीं को मिलती है जो जागते हुवे सपना देखते हैं |सोने वाले तो पूरी जिंदगी सोकर ही बीता देते हैं |आज राजस्थान की मिट्टी की खुशबू सारे विश्व  में जन जन तक स्वर्ण पदक के रूप में फैल गई है| 11 साल की उम्र में ‘एक्सीडेंट’ हो गया था |पहला मेडल उधार की राइफल से जीता था | इन्होंने  2015 से शूटिंग करना शुरू किया था | आज महिलाओं  के आर-2  10 मीटर एअर राइफल के क्लास SH1 में  प्रथम स्थान प्राप्त किया | अवनी ने नवंबर  2019 में एक मौखिक साक्षात्कार में कहा था : मेरी इच्छा है कि 2020 में  होने वाले टोकियो पैरालम्पिक  में गोल्ड मेंडल जीतूँ |आज प्रबल इच्छा ही थी जो स्वर्ण पदक जीत कर भारत का मान दुनिया में बढ़ा दिया |

अवनी के इस मुकाम के पीछे उनके पिता का बहुत बड़ा हाथ है | जिस बेटी के सिर पर पिता का हाथ हो वह दुनिया के हर असम्भव  कार्य को सभव कर सकती है |माँ बाप के स्नेह और प्यार में इतनी ताकत होती है कि कठिन रास्ते भी आसान हो जाते हैं |बस औलाद में कुछ पाने कि लगन और जजबा होनी चाहिए |

अवनी लेखरा की संक्षिप्त जीवनी| Biography of Avni Lekhra

 

नाम अवनी लेखरा
जन्म तिथि 8 नवंबर 2001
जन्म स्थान जयपुर, राजस्थान ,भारत
उम्र 20 साल
लंबाई (hight) 5.2 फीट
वजन 55 केजी
पिता का नाम प्रवीण लेखरा
माता का नाम श्वेता लेखरा
कोच चन्दन सिंह
खेल एअर राइफल शूटर

 

अवनी लेखरा व्हील चैयर पर कैसे आईं ?

साल 2012 अवनी लेखरा के लिए काल बनकर आया |अवनी जब 11साल की थी तब एक सड़क दुर्घटना में पिता और पुत्री दोनों घायल हो गए |कुछ समय बाद अवनी के पिताजी स्वस्थ हो गए लिकिन अवनी की रीढ़ की हड्डी टूट जाने से अवनी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकी और उसे व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा |

इस दौरान अवनी बहुत निराश और हतास हो गई थी |लेकिन उसने माता पिता के प्रयास और आत्मविश्वास दिलाने से अवनी सकारात्मक हुई और निशानेबाजी को आफ्ना करियर चुना | अपने कठिन परिश्रम और लगन से आज इस मुकाम में है कि पूरे भारत को इस जबाज़ पर नाज़ है |

प्रेरणा श्रोत अभिनव बिंद्रा जी –

सड़क दुर्घटना के बाद हाथ लगी निराशा से उबर ने में असहजता को देखकर माता पिता भी भी चिंतित हो गए |एक दिन पिता को औलाद कि चिंता खाये जा रही थी |तभी आचानक उनके दिमाग में कुछ तरकीब सुझी  और उन्हों ने अभिनव बिंद्रा की बायोग्राफी अपनी लाढली को दिया | फिर क्या, बायोग्राफी से अवनी अति प्रभावित हुई और निशानेबाजी को ही अपना करियर चुन लिया | अपने घर के समीप ही शूटिंग रेंज पर जाकर अभ्यास करने लगी | इस कार्य में इनके कोंच चन्दन सिंह की अहम भूमिका रही और वह सदैव अवनी का उत्साह वर्धन करते रहते थे |

कोच की भूमिका

मुकाम हासिल करने में किसी भी छात्र के लिए गुरु द्वारा किए गए  उत्साह वर्धन की अहम भूमिका होती है | यदि किसी भी कार्य के लिए सराहना नहीं मिले तो नकारात्मकता जन्म लेने लगती है |बहुत कम व्यक्तित्व होता है जो किसी की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होता है | ऐसे में अवनी के कोंच ने समय -समय पर प्रोत्साहित करते रहते थे और अवनी का पूरा ध्यान शूटिंग  में केन्द्रित करने में एकाग्र करने की सलाह देते रहते थे |जिसका परिणाम आज गोल्ड मेडल के रूप में भारत के सामने है |

भारत माता की जय ………

FAQ

Q- अवनी लेखरा किस खेल से संभान्ध रखती हैं ?

Ans- एअर राइफल शूटर

Q- अवनी लेखरा कैसे व्हील चेयर पर कैसे आई ?

Ans- सड़क दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण व्हील चेयर पर आ गई |

Q- अवनी लेखरा के कोच का नाम क्या है ?

Ans- कोच का नाम चन्दन सिंह है |

यह भी पढ़े:

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2.नीरज चोपड़ा भाला फेंक बायोग्राफी 

3.दीपिका कुमारी तीरंदाज बायोग्राफी 

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