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Krishi Kanoon News In Hindi|कृषि कानून नीउज़ हिन्दी में जाने

Krishi Kanoon News In Hindi- लंबे समय से किसान आन्दोलन को देखते हुवे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया|कृषि कानून लाने के बाद का असर और वापस लेने के बाद , कृषि क्षेत्र में इसका क्या प्रभाव पड़ेगा |किसानों के जीवन में क्या अंतर आएगा |

आइये निम्नावत एक्सपर्ट की राय जानते हैं कि कृषि बिल कानून को पीएम द्वारा वापस लेने पर उनका क्या कहना है |

प्रश्न- इन कानूनों के आने के बाद कृषि क्षेत्र में क्या प्रभाव पड़ा ?

उत्तर-  सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कृषि कानूनों को रोक कर रखने के लिए कहा गया था |इसीलिए सरकार कानूनों को लागू नहीं कर पाई |जिसके कारण कृषि कानूनों का अधिक प्रभाव दिखाई नहीं दिया|सिर्फ कुछ एक प्रदेश में मंडियों पर असर पड़ा था|जिसके कारण मंडियाँ बंद होना शुरू हो गईं थी| जैसे- उत्तरप्रदेश ,मध्य प्रदेश और गुजरात में मंडियाँ बंद होना शुरू हुई थी |

प्रश्न- कृषि कानून वापसी से छोटे किसानों के जीवन में क्या प्रभाव पड़ेगा ?

उत्तर -कानून वापस लेने का मतलब सीधा हैं  ‘फिर चुहिया कि चुहिया’  पहले जहां थे वापस वही आ गए|खेती का संकट बरकरार |अब फिर सवाल खड़ा हो गया कि किसानों को इस संकट से कैसे निकाला जाय? इसका एक ही रास्ता है ,गारंटीड कमाई और न्यूनतम सपोर्ट प्राइस (MSP)|अगर MSP के लिए कानून बना  दिया जाय और सभी 23 फसलों पर अनिवार्य कर दिया जाए तो ,MSP से नीचे खरीद  नहीं होगी|तत्पश्चात किसान खेती के संकट से बाहर निकल आएंगे |

प्रश्न – देश कि GDP पर क्या इसका असर दिखेगा ?

उत्तर -MSP को यदि कानूनी अधिकार बना दिया जाय तो निश्चित रूप से देश की GDP में 15% तक का इजाफा हो जाएगा|जैसे- सातवा वेतन आयोग आया था तो बीजिनेस इंडस्ट्रिज वालों ने कहा था, कि यह बूस्टर डोज़ की तरह है |बूस्टर डोज़ का मतलब यह हुआ कि, जब लोगों के पास ज्यादे पैसा आएगा, तो निश्चित रूप से मार्केट में भी पैसा बढ़ेगा |

जब डिमांड होगा तो निश्चित रूप से इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन बढ़ेगा |यदि 4% आबादी की तंख्वाह बढ़ती है, तो आप समझ सकते हैं कि ,50% आबादी के पास ज्यादा इन्कम होगी और जब ज्यादा इन्कम होगी, तो डिमांड भी ज्यादे जेनेरेट होगी|यह संकट अर्थशास्त्रियों का बनाया हुआ है जो किताबों से बाहर नहीं निकालना चाहते हैं |

प्रश्न- क्या दूसरे देश में इस तरह के रिफॉर्म पूर्ण रूप से सफल रहे हैं ?

उत्तर – मोदी सरकार जिस रिफॉर्म को मार्केट में लाने का प्रयास कर रही थी ,वह रिफॉर्म पूरी दुनिया में नाकाम रहा |कहीं सफल नहीं हुआ है|कोई ऐसा देश नहीं जहां किसानों की दुर्दशा न हो |जैसे -अमेरिका, यूरोप, कैनेडा औस्ट्रेलिया सभी जगह किसान परेशान हैं |

आप को यह जानकार हैरानी होगी कि अमेरिका जैसे देश जो दुनिया में महा शक्ति के रूप में जाना जाता है | यहाँ के किसानों के ऊपर 425अरब डॉलर का कर्ज है |यहाँ शहरों की तुलना में गाँव में आत्महत्या रेट 45% ज्यादा है |यहाँ किसानों के पास जमीन की बिलकुल कमी नहीं है |लेकिन फिर भी किसान खेती संकट से गुजर रहे हैं |

पीएम चाहते थे किसानों की जिंदगी बदलना| 
आज भी 70% गाँव के लोग खेती से ही अपना भरण पोषण करते हैं |जिसमें 82% किसान छोटे तपके के हैं और सीमांत हैं |सरकार बहुत उत्साह के साथ इस कृषि कानून को लेकर आई थी, कि किसानों कि जिंदगी बादल देंगे |खासकर छोटे और मझौले किसानों  की|
सरकार की मनसा थी की इस कानूनों के आ जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी |हालांकि ,किसानों का एक ग्रुप प्रारम्भ से ही इस कानून का विरोध कर रहा था| इसमें MSP और APMC मंडी ऐसे दो पॉइंट हैं ,जिनपर किसानों के दिलो दिमाग में शंकाएँ हैं | कानून वापस ले लेने  के बाद अब जल्द ही आन्दोलन समाप्त होने की उम्मीद हैं | 
कृषि मंत्री ने इस पर क्या कहा-   बहुत ही मार्मिक ,हम किसानों को समझने में असफल रहे |कानून वापसी पर श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा: इन सुधारों से पीएम ने कृषि में बदलाव लाने की कोशिश की थी |परंतु कुछ किसानों ने इसका विरोद्ध किया |हलोगों ने समझने की कोशिश की, चर्चा का रास्ता अपनाया |लेकिन सफल नहीं हो पाये |इसीलिए प्रकाश पर्व पर पीएम ने कृषि कानून को निरस्त करने का फैसला लिया |यह एक स्वागत योज्ञ कदम है |

MSP के लिए बनेगी कमेटी

उनहोंने यह कहा कि ज़ीरो बजट फ़ार्मिंग ,MSP ,क्रॉप डायवर्सिफिकेशन से जुड़े मुद्दों पर एक कमेटी बनाई जाएगी| कमेटी में केंद्र ,राज्य सरकारें,किसान, वैज्ञानिक और अर्थ शास्त्री शामिल होंगे |यह MSP को पारदर्शी और प्रभावी बनाने और अन्य मुद्दों पर रिपोर्ट पेश करेगा |

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किन किन कृषि कानून के खिलाफ किसान आन्दोलन कर रहे थे ?  

1.आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020- आपको बतादें कि इस कानून में अनाज ,दलहन ,तीलहन ,खाद्य तेल ,प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं कि सूची से हटाने का प्रावधान है|सरकार के हिसाब से इससे किसानों को उनकी फसल की उचित मूल्य प्राप्त होगी क्योंकि बाजार में प्रतियोगिता यानि कंपेटीशन बढ़ेगी | 

2.कृषक (सशक्तिकरण -संरक्षण )कीमत आश्वासन और कृषि सेवा प्रकरण विधेयक 2020  

इस कानून के अंतर्गत कृषि क़रारनामा ( कृषि एग्रीमेंट) पर नेशनल फ्रेम वर्क का प्रावधान किया गया था|यह प्रावधान बड़ी आसानी से कृषि उत्पादों की बिक्री,फार्म सेवावों ,कृषि बीजिनेस फर्म,थोक और खुदरा बिक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जोड़ता है |इसके साथ किसानों को गुणवत्ता वाले बीज की आपूर्ति काराना, स्वस्थ फसल की निगरानी ,कर्ज की सुविधा और साथ ही फसल बीमा की सुविधा मुहैया की बात इस कानून में है |

3.कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण )विधेयक 2020 
इस कानून में एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रावधान किया गया है |जिसमें किसानों और कारोबारियों को मंडी के बाहर फ़सल बेचने की आजादी होगी | इस कानून में राज्य के अंदर और दो राज्यों के बीच कारोबार को बढ़ावा देने की बात की गई है |इसके अलावा मार्केटिंग और आने जाने का खर्च कम करने की बात भी इस कानून में की गई है |

यह भी पढे:

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2.सुकन्या समृद्धि योजना 

3.who is Neeraj Chopda Jaat

द्वारा-इंटरनेट news

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