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Guru Nanak Dev Jivani In Hindi गुरु नानक देव की जीवनी जयंती

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Guru Nanak Dev Ki Jivani In Hindi | गुरु नानक देव का जीवन परिचय,जयंती,जीवनी,इतिहास,कहानी,निबंध,गुरुपर्व,धर्म,जाति,जन्म, मृत्यु,गुरु,शिष्य,परिवार, निधन, (Guru Nanak Dev Ji Biography In Hindi,History,Stories,Education,Essay,Birth,Family,Guruparv,Happy gurupurab,Gurunanak,Jayanti,Insipiration,Cast,Career,history of Gurunanak Dev Ji in hindi ,story,Death 

Table of Contents

Guru Nanak Dev Jivani In Hindi -गुरुनानक देव जी सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के प्रथम गुरु थे | उनकी भक्ति और शिक्षा दोनों दूसरों से भिन्न था |

वे भारत के महान आध्यात्मिक गुरु थे | सभी धर्म के लोग उनकी शिक्षा और भक्ति का सम्मान करते थे | वे मानव जाति और समाज के उत्थान के प्रति काफी सक्रिय थे |जिस समय सभी धर्म के लोग आपने अपने धर्म के प्रति केन्द्रित थे|

वैसे समय में गुरु नानक जी ने मानवता और मानव जाति का संदेश फैलाया |इतना हीं नहीं महिलाओं  के अधिकारों और उनकी समानता के बारे में बात की |उन्होंने चारों दिशाओं में घूम-घूम कर लोगों के बीच अपना संदेश स्थानीय भाषाओं के मधायम से पहूँचाया |

गुरु नानक जी का जीवन परिचय |Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

नाम नानक
सीख धर्म में नाम गुरु नानक देव
निक नेम(nick name) बाबा नानक
प्रसिद्धि /famous for सिख धर्म के संस्थापक
जन्म तारीख  DOB 15 अप्रैल 1469 (कार्तिक पुर्णिमा )
जन्म स्थान /DOB तलवंडी गाँव ,लाहौर पाकिस्तान
मृत्यु /DOD 22 सितंबर 1539 करतारपुर, पाकिस्तान
स्मारक समाधि Memorial tomb करतारपुर पाकिस्तान
उम्र /Age 70 वर्ष मृत्यु के समय
कार्यकाल/guruship साल 1499 – 1539 तक
धर्म /Religion सिख
पूर्वाधिकारी/Predecessor स्व जन्म से
जाति खत्री कुल
नागरिकता सिख
उतराधिकारी गुरु अंगद देव
वैवाहिक स्थिति (Marital Status शादीशुदा

 

गुरुनानक देव का जन्म (Guru Nanak Dev Birth)|Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

गुरु नानक देव के जन्मदिन को प्रकाश पर्व के रूप में सिख धर्म के लोग बड़े ही श्रद्धा के साथ धुम-धाम से मनाते है |इनके जन्म को तिथि के अनुसार कार्तिक मास के पुर्णिमा तिथि को  गुरु पर्व के रूप में भी मनाया जाता है |

इनका जन्म पंजाब प्रांत के रावी नदी किनारे स्थित तलवंडी नामक गाँव में हुआ था जो आज पाकिस्तान में है |नानक जी का जन्म एक हिन्दू परिवार में हुआ था |पिताजी का नाम कल्याणजी या मेहता कलु चंद जी था और माता का नाम तृप्ति देवी था | इनके पिता एक किसान के साथ-साथ गाँव के लेखपाल भी थे |

यह भी पढ़ें :गुरु नानक जी के 20 उपदेश

जिस घर में नानकजी का जन्म हुआ था |आज उस घर के एक तरफ “ननकाना साहिब ” नामक एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो आज पाकिस्तान में है |नानक को सिंध और पंजाब का पैगंबर कहा गया है |

नानक की एक बड़ी बहन थीं, जिनका नाम बेबे नानकी था |नानकी इनसे 5 साल बड़ी थीं| नानकजी बेबे से बहुत प्यार करते थे |इनका अधिकान्श बचपन नानकी के साथ बिता है |बेबे की शादी 1475 में हो गई और वो सुल्तानपुर चली गई |

गुरुनानक देव का परिवार (Guru Nanank Dev Family)|Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

पिता का नाम (Father) लाला कल्याण राय (मेहता कलु चंद जी )
माता का नाम (Mother) तृप्ति देवी
बहन का नाम (Sister) नानकी देवी
पत्नी का नाम (Wife) सुलखनी देवी
बच्चों के नाम श्रीचंद एवं लखमीदास

 

गुरुनानक देव का विवाह (Guru Nanak Marriage)|Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

गुरु नानक देव का विवाह मात्र 16 साल की उम्र में 24 सितंबर 1487 में गुरुदासपुर जिले के लाखौकी नामक स्थान के रहने वाले मुला की बेटी सुलखनी देवी से हुआ था |

32 साल बाद प्रथम पुत्र श्रीचंद का जन्म हुआ 4 साल बाद दूसरे बेटे लखिम दास का जन्म हुआ | नानकजी के प्रथम पुत्र आगे चलकर उदासी संप्रदाय के जनक बने | नानक जी सुल्तानपुर में पास के नदी में स्नान करने जाते थे, वहीं प्रति दिन ध्यान करते थे |

एक दिन स्नान के लिए गए तो तीन दिन तक नदी किनारे लेटे रहे | जब तीसरे दिन घर आए तो उनका व्यवहार बिलकुल असमान्य व्यक्ति की तरह था | जब उनसे बात की गई तो उन्हों ने बोला ‘कोई हिन्दू नहीं कोई मुश्लिम नहीं’ यही से उनकी शिक्षाओं की शुरुवात माना गया था | 

1507 में गुरु नानक देव ने भगवान भरोसे अपने परिवार को छोड़ दिया और अपने साथियों के साथ तीर्थाटन के लिए निकल पड़े |इनके मित्रों का नाम मरदाना ,लहना, बाला,और रामदास था | यह भी पढ़ें APJअब्दुल का प्रेरणादायक कोट्स 

गुरु नानक देव की पाँच यात्राएं (Guru Ganak Five Journeys)|Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

गुरुनानक देव जी ने 24 साल में 28 हज़ार किलोमीटर की पैदल यात्रा किए ,मतलब की एक साल में लगभग 1,167 किलोमीटर का सफर तय किया और 24 साल में दो महाद्वीपों के 60 प्रमुख शहरों की भी पैदल यात्रा की |

इस दौरान उन्हों ने 28 हज़ार किलोमीटर का सफर किया था |जिसमें भारत के अलावा विदेश में भी उन्हों ने यात्रा किया जिसमें श्रीलंका ,म्यांमार मक्का मदीना,दक्कन ,तुर्की ,अरब,बगदाद,काबुल,कंधार और सियाम की भी यात्रा की |

उन्होंने पंडितों पुजारियों और मुश्लिम पादरियों के साथ वाद-विवाद भी किया |इतना हीं नहीं गया ,हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थानों के पंडों से भी वाद विवाद किया |Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

  • प्रथम यात्रा : उन्होने पाकिस्तान और भारत के सर्वाधिक हिस्सों में जाकर संदेश फैलाया |इस यात्रा में 1500से लेकर 1507 का तक यात्रा किए जिसमें 7 साल का समाया लगा |
  • दूसरी यात्रा  :इस यात्रा में वर्तमान के श्रीलंका के सर्वाधिक हिस्सों का दौरा किया ई|इस दौरान भी इन्हें 7 साल लगे |
  • तृतीय यात्रा: इस दौरान पर्वतीय क्षेत्रों का दौरा किया जिसमें नेपाल सिक्किम ,तिब्बत,तस्कन्द और कश्मीर का दौरा किया |यह यत्र 1514 से लेकर 15 19 तक चली | लगभग 5 साल में यह यात्रा पूरी हुई |
  • चौथी यात्रा :इस दौरान मक्का और मध्य पूर्व के कई स्थानों का दौरा किया जिसमें 3 साल लग गए |
  • पाँचवी यात्रा : इस यात्रा में उन्होंने 2 साल तक पंजाब का दौरा किया और संदेश फैलाया |ऐसा माना जाता है की अपने जीवन का 24 साल पद यात्रा करने और समाज को सुधारने में बिताया |लगभग 28000 हजार किलोमीटर की यात्रा पैदल हीं किया था |
गुरुनानक देव की शिक्षा (Guru Nanak Teaching)|Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

नानकजी ने लोगों को सिखाया को भगवान को पाने के लिए किसी अनुष्ठान व पुजारियों की जरूरत नहीं है |परमात्मा को पाने के लिए सिर्फ नाम जपना ही काफी है| जरूरतमंदों की सेवा और मदद करके आध्यात्मिक जीवन कैसे जिया जाता है सिखाया |

किसी भी तरहा के बेईमानी और धोखाधड़ी व शोषण से दूरी बनाने की सलाह दी |मूलतः उन्हों ने अपनी शिक्षा के माध्यम से सीख धर्म के तीन स्तंभो की स्थापना किया जिंका निम्नवत वितर से उल्लेख किया गया है |

  • नाम जपना :इसका मतलब उस परमात्मा के नाम को बार बार जपना ,दुहराना |भगवान के गुणो का अध्ययन करना ,गीत संगीत के माध्यम से गायन करना किटन करना |ईश्वर के नाम को विभिन्न तरीकों से जपना|भगवान प्राप्त करने का  यहीं उतम मार्ग है |
  • किरत करणी: इसका सीधा मतलब है ईमानदारी के मार्ग पर चलना |सामनी जीवन जीना |ईमानदारी से कमाई करना |सदैव सुख और दुख को भगवान का दिया हुआ उपहार मानना और आशीर्वाद के रूप में सहर्ष स्वीकार करना |
  • वंद चकना : इसका सीधा अर्थ है अपनी कमाई का कुछ हिस्सा लोगों में बाँटना और उपभोग करना |इसका मतलब कि आप अपने मेहनत से जो भी धन अर्जित करते हैं, लोगों के बीच बांटें और सहयोग करें | यह भी पढ़ें कृष्ण के इन्सीपिरेशनल कोट्स 

वंद चकना सीख धर्म का एक महत्व पूर्ण स्तम्भ है |जहां प्रत्येक सीख समुदाय के लोग अपने कमाए हुए धन में से योगदान करते हैं |यहीं वजह है कि आज सीख समुदाय द्वारा जगह जगह लंगर चलाया जाता है| जहां लोगो को निःशुल्क भोजन कराया जाता है |

गुरु नानक देव कि रचनाएँ (Books)|Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

  • यह मन नेक न कह्यौ करे
  • जो नर दुख में दुख नहीं मानें
  • या जग मीत न देख्यों कोई
  • अब मैं कौन उपाय करूँ
  • प्रभु मेरे प्रीतम प्रान पियारे
  • काहे रे बन खोजन जाई
  • मुसीद मेरा मरहमी
  • हौं कुरबाने जाऊँ पियारे
  • सब कुछ जीवित कौ व्यौहर
  • राम सुमिर राम सुमिर
  • सूरा एक न आंखिए
  • को कहूँ को भाई
  • झूठी देखि प्रीत
  • जपु जी

प्रकाश पर्व /गुरूपर्व |Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

प्रकाश पर्व को गुरु पर्व भी कहा जाता है |गुरुनानक देव शिख धर्म के संस्थापक के साथ साथ सिखों के प्रथम गुरु भी हैं |नानक जी ने समाज के प्रत्येक व्यक्ति को साथ में रहने खाने और मेहनत से कमाई करने एवं  सभी को सद्भाव पूर्वक रहने का संदेश दिया था| इसी लिए गुरुनानक देव के जन्म दिवस को देश विदेश में प्रकाश पर्व व गुरु पर्व के रूप में मनाया जाता है |

यह भी पढ़ें गुरु शंकराचार्य की जीवनी 

मन की बुराइयों को दूर कर उसे सत्य ईमानदारी और सेवा भाव से प्रकाशित करना प्रकाश पर्व कहलाता है |प्रकाश पर्व शिख समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा पर्व है |प्रकाश पर्व के कुछ दिन पहले से हीं सुबह में प्रभात फेरियाँ निकाली जाती है |Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

इस दौरान रास्ते में भजन कीर्तन द्वारा भक्तों को निहाल किया जाता है और गुरु नानक देव जी के अनमोल वचनों को सभी के बीच बताया जाता है |इन दिनों प्रति दिन कम से कम दो घरों में जाकर कीर्तन भी किया जाता है | 

यह भी पढ़ें कृष्ण की 10 नीतियाँ 

प्रकाश पर्व पर सभी गुरुद्वारों में कीर्तन भजन अरदास और लंगर का आयोजन होता है |इस दिन गुरुद्वारे में दीवान सजाये जाते हैं |इनके जन्म के उपल्क्ष्य में नगर नगर में भव्य कीर्तन जुलूस निकाला जाता है |

आप इसे भी पढ़ सकते हैं वेबदुनिया

इसकी अगुवाई पंज यानि पाँच प्याने नगर कीर्तन करते हैं |श्री गुरुग्रंथ साहिब को फूलों से सजे पालकी में सुसज्जित वाहन द्वारा कीर्तन करते हुए विभिन जगहों से होते हुए  गुरुद्वारे पहुँचते हैं |इस वर्ष 2022 में गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती मनाई जाएगी |

 गुरु नानक देव के 5अनमोल वचन|Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

  • यदि तू अपने दिमाग को शांत रख सकता है ,तो तुम विश्व पर विजयी होगा |
  • कठिनाइयों से भरी इस दुनिया में जिसे अपने आप पर भरोशा होता है ,वहीं विजयी कहलाता है |
  • अपने जीवन में यह कभी ना सोचें यह असंभव है |
  • हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहें क्योंकि जब आप किसी की मदद करते हैं तो ईश्वर आपकी मदद के लिए तैयार रहता है |
  • संसार को जीतने के लिए सबसे पहले अपनी कमियों और विकारों पर विजय पाना जरूरी है |Guru Nanak Dev Jivani In Hindi

FAQ:

Q-गुरुनानक जी का जन्म कब और कहाँ हुआ ?

ANS- गुरुनानक देव का जन्म 15 अप्रैल 1469में पंजाब प्रांत के लाहौर जिले में स्थित तलवंडी गाँव में हुआ था जो आज पाकिस्तान में है |

Q-बाबा गुरु नानक देव जी कि प्रमुख शिक्षाए क्या थी ?

ANS-नाम जपो ,किरत करो और वंद चकना जिसका मतलब होता है अपनी कमाई का कुछ हिस्सा लोगों में बांटना |

Q-गुरुनानक जी के कितने बेटे थे ?

ANS-गुरुनानक जी के दो बेटे थे | श्री चंद और लक्ष्मी चंद |

Q-गुरु नानक जी के पत्नी का नाम क्या था ?

ANS- सुलखनी देवी |

Q-गुरु नानक के माता पिता का क्या नाम था ?

ANS-माता तृप्ति देवी और पिता कल्याणजी राय (मेहता कालु जी )

Q-गुरुनानक जी की प्रमुख रचनाएँ कण कौन सी हैं?

ANS-निरबैर ,अकाल मुरति,अजूनी,सैभंगुर प्रसादि है |

Q-गुरु नानक जी की मृत्यु कब हुई ?

ANS- नानक जी की मृत्यु 22 सितंबर 1539 को हुई |

निष्कर्ष -आशा करती हूँ कि गुरुनानक जी की  जीवनी और अनमोल वचन का मेरे द्वारा संग्रह आपके जीवन को सफल बनाने में मददगार साबित हो |यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट करके जरूर बताएं |धन्यवाद

 

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