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HomeMUSIC LYRICSJanakpur Madwa Geetआज जनकपुर मे मड़वा पारम्परीक विवाह गीत

Janakpur Madwa Geetआज जनकपुर मे मड़वा पारम्परीक विवाह गीत

Janakpur me Madwa Geet |जनक पुर में मड़वा बड़ा सुहावन लागे 

Janakpur Madwa Geet- हेलो दोस्तो , यदि आप विवाह गीत की खोज में है,तो इस आर्टिकल में आपको भोजपुरी का बहुत हीं सुंदर और कर्ण प्रियJanakpur Madwa Geet लिरिक्स गायकी के साथ साथ माधुर आवाज में विडियो प्रदान किया गया है जो नीचे है |

साथियों,यू पी बिहार में गाए जाने वाले किसी प्रयोजन पर का गीत हमारी वेब साइट पर उपलब्ध आपको करने का प्रयास किया जा रहा है | इस मार्मिक गीत को सुने और ज्यादे से ज्यादे शेयर करें |

(Aaj Janakpur Me Madawa paramparik vivah geet || Sung By Krishnawati Kumari )

 

 







Singer- KRISHNAWATI KUMARI

LYRICS

Paramparik geet.vibah geet

Aaj janakpur me Madawa Bada suhawan Lage.

Sita ke chade la haradiya man bhawan Lage

Hare hare basawa katawle janak raja

Man me sunaina Mai ke bajela aanand Baja

Sor bhaile sagari mahliya bda lubhawan Lage

Aaju.. ……….,………

Dhani re nagariya ke umadal bhagiya

Lagli sunar diya ke Amar suhagiya

Chauka purawal anganawa Bada Pawan lage

Aaju..,………………

Aakhi ke putariya he bhejbo nagriya

Dharati daraki jaeehe girihe bijuriya.

Jhar jhar barse nayanawa Jaise sawan lage

Aaju janak………..

हिन्दी में

आजा जनक पुर में मड़वा बड़ा सुहावन लागे

सीता के चढ़ेला हरदिया मनभावन लागे 
– हरे हरे बासवा कटवले जनक राजा 
मन में सुनैना रानी के बजेला आनंद बाजा
 सोर भईले सागरो महलिया 
बड़ा लुभावन लागे 
सीता के चढ़ेला  हरदिया
मन भावन लागे |
आजू जनकपुर में माड़वा बड़ा  सुहावन लागे …

-धनी रे नगरिया के उमड़ल भागीया

लगली सुनर धिया के
अमर सुहागिया
चौका पुरवाल अंगनवा
बड़ा पावन लागे
आजू जनकपुर में माडवा बड़ा सुहावन लागे… 
आंखी के पुतरिया हो
भेजबों नगरिया से
धड़की धड़की जइहें
गिरिहें बिजुरिया

झर झर बरसे नयनवा जैसे सावन लागे

आजू जनक पुर में मड़वा बड़ा सुहावन लागे |..

हल्दी गीत.

सोने के ढकनी में हरदी घोरवली,
उस पर हरी –हर दूभ जी पहले चढावथीन पापा
अपन पापा तब सकल परिवार जी 

अगेमाई हरदी हरदीया दूभी पातर न ।
अगे माई कउनी तौर हरदी चढावलन न ।
अगे माई पापा जे हतन अपन पापा
अगे माई आहे पापा हरदी चढावलन न ।
अगे माई – – – – – – – -2

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FAQ:

Q-विवाह के कितने कर्म होते हैं

ANS-विवाह संस्कार में हल्दी कुटाई , तिलक रश्म, पित्र नेवतनी ,(पित्र आह्वान ) भूमि पूजन, कथा,तत्पश्चात दूल्हा समाज सहित बाजे गाजे सहित बारात लेकर दुलहन के घर जाता है |वह द्वार पूजा होता है,कन्या निरीक्षण होता है |उसके बाद दूल्हा को बुलाहट जाती है |तब शादी के मंडप में पंडितजी द्वारा वेद मंत्रोचारण के साथ दूल्हा व दुल्हन का गठबंधन कर अग्नि के सामने सात फेरों के सात वचन लिए जाते हैं। पहले तीन फेरो में दुल्हन आगे रहती है| बाद के चार फेरों में दूल्हा आगे रहता है। दूल्हा दुल्हन को सात वचन देता है, वहीं दुल्हन भी दूल्हे को सात वचन देती है। इसके बाद विवाह संस्कार का कार्यक्रम पूरा होता है

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