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PREET HAI AJAB NIRALI /प्रीत है अजब निराली।

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      PREET HAI AJAB NIRALI    

Preet hai ajab nirali
नमस्कार, साथियों मैं Krishnawati Kumari इस ब्लॉग की krishnaofficial.co.in की Founder & Writer हूं I मुझे नई चीजों को सीखना  अच्छा लगता है और जितना आता है आप सभी तक पहुंचाना अच्छा लगता है I आप सभी इसी तरह अपना प्यार और सहयोग बनाएं रखें I मैं इसी तरह की आपको रोचक और नई जानकारियां पहुंचाते रहूंगी।

 

 

 

              प्रीत है अजब निराली  

       जब प्रीत की लत लग जाती है
       दिन रैन चैन नहीं आती है।
       हियरा में आग लगाती है।
       रैना निंदिया नहीं आती है।
       जिया धड़क धड़क
        जिया तड़प तड़प
        रहिया में नैन बिछाये हैं।
        आवन की आश लगाये हैं।
        चाहे प्रीत मीत के संग में हो।
        चाहें  प्रीत पिया के रंग में हो ।
        बड़ी प्यारी है ओ दुलारी हैं।
         महके जैसे फुलवारी  हैं।
         रंग  ऐसा है जहां चढ़ जाये।
         उसपर दूजा ना रंग भाये।  
         प्रीत पावन है मन भावन है।
         प्यासे की प्रयास बुझावन है।
         बन्द आंखों में मुझे रहने दो।
         श्रींगार प्रीत का करने  दो।
          कोई रोको ना  कोई टोको ना।
          प्रीत जी भरके मुझे जीने दो।
शिक्षा- इस कविता में व्यक्ति के आजादी का वर्णन किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति आजाद रहना चाहता है। जिससे भी प्रेम हो समर्पित होकर उसके साथ इन्सान जीना चाहता है।
                          धन्यवाद दोस्तों 
                          रचना- कृष्णावती
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