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Mang Ka Sindoor

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Mang Ka Sindoor|शादी में क्यों लगते हैं भाखरा सिंदूर

Mang Ka Sindoor – आइये इस पोस्ट में जानते हैं कि,बिहार,उत्तर प्रदेश और झारखंड में वर वधू की शादी में दूल्हा दुलहन का मांग नारंगी रंग के सिंदूर से ही क्यों भरता है|जिस सिंदूर को भाखड़ा सिंदूर भी कहा जाता है |

आपको बतादें की हिन्दू धर्म में विवाह के दौरान सिंदूर लगाने की प्रथा सदियों से चली आ रही है |हमारे महाग्रंथ महाभारत और रामायण में भी इसका जिक्र मिलता है |सिंदूर के कई रंग होते है जिसमें सबसे प्रचलित नारंगी और लाल रंग है |

क्यों अहम है भाखरा सिंदूर- 

ज़्यादातर भारतीय शादियों में लाल रंग के सिंदूर का महत्व है |परंतु बिहार ,उत्तरप्रदेश और झारखंड में सिंदूरदान के समय लड़का लड़की को भाखरा सिंदूर जो नारंगी रंग का होता है,से दुलहन का मांग भरता है|इन राज्यों में किसी भी शुभ मंगल कार्य में भाखरा सिंदूर ही महिलायेँ लगाती है|इतना ही नहीं देवी देवता को प्रसन्न करने के लिए भी भाखरा सिंदूर का ही प्रयोग किया जाता है|

पौराणिक कथाओं में नारंगी सिंदूर का जिक्र-

एक बार हनुमानजी ने देखा की सीताजी अपने मांग में सिंदूर लगा रही हैं |फिर क्या, हनुमानजी उत्सुक होकर बोले- माते-माते आप यह सिंदूर क्यों लगाती हैं ? सीताजी ने जवाब दिया – जानते हैं हनुमान ,जब मैं मांग में सिंदूर लगाती हूँ, तो आपके स्वामी श्री राम जी बहुत प्रसन्न होते हैं |

अब हनुमानजी मन ही मन सोचने लगे कि ,इस सिंदूर को लगाने से प्रभों श्री राम सीता माता से प्रसन्न रहते हैं, तो मैं भी सिंदूर लगाऊँगा तो प्रभों मुझसे भी प्रसन्न रहेंगे और इसी तरह हनुमानजी एक दिन अपना पूरा शरीर नारंगी सिंदूर से रंग कर भगवान श्री राम के सभा में पहुंचे थे|

यह देखकर श्री राम जी मुस्कुराते हुवे बोले-हनुमान,आपने यह क्या किया है |हनुमानजी ने कहा -सीता मैया सिंदूर लगाती हैं तो आप उनसे बहुत प्रसन्न रहते हैं |इसीलिए मैं भी आपको प्रसन्न करने के लिए लगाया हूँ |इस तरह हनुमानजी ने अपना समर्पण रामजी के प्रति दिखाया था |सिंदूरदान के समय सिंदूर का प्रयोग भी पति पत्नी के समर्पण को दर्शाता है |

नारंगी रंग से ही शादियाँ क्यों होती है

हिन्दू धर्म में विवाह का रस्म बड़े धूम धाम और मंत्रौच्चारण के साथ होता है|कई विद्वान पंडित और शास्त्री द्वारा विधि विधान से पूरी रात संस्कृत मंत्र का सस्वर पाठ चलते रहता है |तदोप्रांत भोर में जाकर विधि पूरी होती है और सारे रस्म सम्पन्न होने के बाद वर वधू के मांग में नारंगी रंग का सिंदूर भरता है| सिंदूरदान की तुलना उस होने वाली भोर की लालिमा से की जाती है जो हल्के नारंगी रंग की दिखाई देती है |

ऐसा माना जाता है कि जिस तरह सूर्य की किरण प्रति दिन लोगों के जीवन में एक नई सुबह, दिव्य ऊर्जा और खुशहाली लेकर आती है |उसी तरह यह सुबह का सिंदूरदान दुलहा दुलहन के जीवन में नया सबेरा लेकर आएगा |रातभर होने वाली सभी रस्मों के पीच्छे यहीं मान्यता होती है कि परिवार के साथ साक्षात देवता चाँद तारे सूर्य सभी साक्षी बन सकें |

कैसे बनता है सिंदूर-

सुहाग के लिहाज से लाल गुलाबी और नारंगी सभी सिंदूरों का महत्व बराबर है |परंतु इन तीनों में नारंगी रंग का सर्वोतम महत्व है |क्योंकि नारंगी सिंदूर प्रकृतिक व शुद्ध होता है |जबकि लाल सिंदूर में मिलावट ज्यादे होती है और केमिकल का भी प्रयोग होता है |इसके वनस्पति नारंगी और गुलाबी रंग के सिंदूर को नेचुरल तरीके से बनाया जाता है |

जब इसके फल सुख जाते है तब इसे पीस कर सिंदूर तैयार किया जाता है |इसी लिए यह बिलकुल सुरक्शित होता है |इससे बाल या त्वचा को किसी प्रकार से हानि नहीं होती है |कोई भी नुकसान नहीं होता है |लेकिन केमिकल युक्त सिंदूर से त्वचा और बाल को हानि होती है |किसी-किसी को तो सिर में खुजली की भी शिकायत हो जाती है |

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