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माँ तू है आधर जीवन का कविता

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माँ तू है आधर जीवन का कविता |Mother is Base Life

बात कुछ यू ही सत्तर 70 के दशक की है। 5 या 6साल की उमर रही होगी। उस समय सारा गांव अन्न के लिए बारिश पर निर्भर हुआ करता था। पुरूष खेत से जो अन्नो पार्जन करते थे। घर की महिलायें उसे कुट पीस कर तैयार करती थी।
आपको बता दूं, कि उस समय धान से चावल ओखल मूसल और गेंहू से आटा चक्की द्वारा हाथ से महिलाएं तैयार करती थीं। यह कोई सुनी सुनाई कहानी नहीं है, मैं उसी मां की बेटी हूँ जो ये सारा काम करती थी।
आज इन्टरनेट और गुगल बाबा को धन्यवाद हो, जिनके माध्यम से अपने दर्द को आप तक पहुंचाने का अवसर प्राप्त हो रहा है। जिस वक्त को मैंने जीया है उस भाव को  पंक्तिबद्ध कर कविता का रूप दिया है ,जो निम्नवत आप सभी का प्यार , सहयोग अपेक्षित है।

                कविता

माँ तू है  आधर जीवन का, माँ तू है  आधर I

 

तू प्रतीक है प्यार की मैया ,तू   संगीत जीवन का I
तू है  रूप धरा की मैया, तू है रूप नारी शक्ति का I

 

जिसकी नहीं कोई परिभाषा , तू ही निराशा में है आशा ।
तेरे डांट में प्यार ही प्यार है,यह है अपनेपन का  परिभाषा ।

 

तू  सृजन है तू बलिदान है, तू स्नेह और प्यार की मूरत ।
तू प्रकृति की अमर धरोहर, तेरी भोली भाली सूरत।

 

तू निर्मल नदिया की धारा,तू शीतल ममता की छाया।
तू अखंड प्रज्वलित ज्वाला है,तूने जीवन जन्नत बनाया।

 

तू अनमोल है मोती जैसे,तू है चेतना की ज्योति।
जब स्पर्श वदन पर करती, पल में सब पीड़ा हर लेती।

 

तेरे  आंचल में सुख पाया, मानो जग सारा हो समाया ।
तुम बिन सुनी बगिया मैया, तुम बिन सारा जग है पराया।

 

बिन बोले सब समझ लेती हो, अपनी बाहों में भरती हो।
तेरा प्यार तनिक ना बिसरे,हिया बीच सदा रहती हो।

 

ब्रह्म वेला से ही मैया तेरी ,दिनचर्या जब शुरू हो जाती।
पेट भरन को सूत काटती,सूत बेच रूपैया पाती।

 

रोटी खातीर चक्की चलाती, अपने पीठ पर हमें झुलाती।
उफ तक नहीं करत है मैया, झूलो राजा, झूलो बेटा, मीट्ठी मीट्ठी बातें करती।

 

फिर क्या, आसन बासन  माज, रसोइया सबके लिए बनाती।
मां मां जब तेरी याद सताये , अश्रु से  अंखिया सदा भर जाती।

 

व्यथित हिया गुहार   लगावे, मां तू अब फिर लौट के आजा।
दर्द को दर्ज होने ना दूंगी,तेरी करेगा चाकरी  सुख का राजा।

 

तू जग में सबसे महान हो, तुझपर सबको सदा नाज हो।
कोटि कोटि नमन चरणो में,तेरे लिए सदा  सम्मान हो।
तेरे लिए सदा सम्मान हो।
तेरे लिए सदा सम्मान हो!!!
मां के चरणों में कोटि – कोटि नमन ।
धन्यवाद पाठकों
रचनाकार- कृृष्णावती कुमारी
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